अनूपपुर ।
जिले के पुष्पराजगढ़ क्षेत्र में सड़क सुरक्षा की स्थिति दिन-ब-दिन चिंताजनक होती जा रही है। यहां तीन-पहिया, चार-पहिया वाहन, ट्रैक्टर, पिकअप और मिनी ट्रक में क्षमता से अधिक सवारियों और भारी सामान को ले जाना आम हो गया है। ग्रामीण क्षेत्रों से बाजार, अस्पताल और सरकारी दफ्तरों तक पहुंचने के लिए स्थानीय लोग इन वाहनों पर पूरी तरह निर्भर हैं, लेकिन ओवरलोडिंग के कारण हर सफर अब जोखिम भरा बन गया है। यह केवल नियमों का उल्लंघन नहीं है, बल्कि आम नागरिकों की जान के साथ खिलवाड़ करने के बराबर है। सड़क हादसों का खतरा इस क्षेत्र में हर दिन बढ़ता जा रहा है और प्रशासन की मौन प्रतिक्रिया इस समस्या को और गहरा बना रही है।
ओवरलोडिंग: मोटर व्हीकल एक्ट के तहत स्पष्ट उल्लंघन
मोटर व्हीकल एक्ट 1988 के अनुसार किसी भी वाहन में निर्धारित क्षमता से अधिक यात्रियों या सामान को ले जाना दंडनीय अपराध है। धारा 66 और 177 के अंतर्गत वाहन चालक को जुर्माना भरना पड़ सकता है, वहीं धारा 194A ओवरलोडिंग के लिए विशेष दंड का प्रावधान करती है, जिसमें वाहन जब्त किए जाने का विकल्प भी शामिल है। पुष्पराजगढ़ में यह नियम बार-बार ताक पर रखे जा रहे हैं। तीन-पहिया और चार-पहिया वाहनों में 6-8 यात्रियों से अधिक, ट्रैक्टर और पिकअप में 12-15 लोग या भारी सामान ठूंस-ठूंसकर ले जाने की घटनाएं आम हो गई हैं। इससे संतुलन बिगड़ने, वाहन पलटने और गंभीर दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है।
सड़क पर रोजाना बढ़ता खतरा: जानलेवा ओवरलोडिंग
स्थानीय लोगों ने बताया कि क्षेत्र के अधिकांश वाहन चालकों द्वारा कम समय में अधिक मुनाफा कमाने के लिए ओवरलोडिंग को नियमित कर लिया गया है। विशेषकर पिकअप और मिनी ट्रक में सामान और यात्रियों को एक साथ ले जाना आम है, जिससे वाहन नियंत्रण में नहीं रहता। ट्रैक्टर पर भी कभी-कभी 10-12 लोग बैठकर सफर करते हैं। यह स्थिति किसी भी समय बड़ा हादसा पैदा कर सकती है। बच्चों, बुजुर्गों और महिला यात्रियों के लिए यह स्थिति बेहद खतरनाक है।
प्रशासन की निष्क्रियता: जिम्मेदार कौन?
ओवरलोडिंग की समस्या लंबे समय से जारी होने के बावजूद प्रशासन और परिवहन विभाग की ओर से प्रभावी कार्रवाई या नियमित जांच अभियान नहीं चलाया गया है। मोटर व्हीकल एक्ट के प्रावधान होने के बावजूद निगरानी की कमी इस स्थिति का मुख्य कारण बन रही है। बिना सख्ती के चालकों द्वारा नियमों की अनदेखी जारी है, जिससे कानून की साख पर भी सवाल उठते हैं। स्थानीय नागरिक प्रशासन से यह उम्मीद रखते हैं कि जल्द से जल्द समस्या को गंभीरता से लेते हुए प्रभावी कदम उठाए जाएँ।
ग्रामीण मजबूरी: सीमित परिवहन साधन और जोखिम भरा सफर
पुष्पराजगढ़ एक दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्र है, जहां सार्वजनिक परिवहन के विकल्प सीमित हैं। ग्रामीण लोग अपने दैनिक कार्य, जैसे कि बाजार जाना, अस्पताल जाना या सरकारी दफ्तर में काम निपटाना, इन वाहनों पर पूरी तरह निर्भर हैं। विकल्पों की कमी के कारण लोग जान जोखिम में डालकर भी ओवरलोड वाहनों में सफर करने को मजबूर हैं। यही वजह है कि यह समस्या केवल नियम उल्लंघन का मामला नहीं बल्कि सामाजिक और आर्थिक मजबूरी से जुड़ी समस्या बन गई है।
सामूहिक जिम्मेदारी: चालकों और यात्रियों दोनों की भूमिका
मोटर व्हीकल एक्ट केवल प्रशासन के लिए निर्देश नहीं देता, बल्कि वाहन चालकों और यात्रियों के लिए भी सुरक्षा जिम्मेदारी तय करता है। वाहन चालकों को निर्धारित क्षमता के अनुसार ही यात्रियों और सामान को ले जाना चाहिए। यात्रियों को भी ओवरलोड वाहनों में सफर करने से बचना चाहिए और नियम उल्लंघन के खिलाफ सतर्क रहना चाहिए। सड़क सुरक्षा एक साझा जिम्मेदारी है, जिसे प्रशासन, चालक और नागरिक मिलकर ही सुनिश्चित कर सकते हैं।
समय रहते कार्रवाई जरूरी:
अगर इस समस्या पर तत्काल नियंत्रण नहीं किया गया, तो पुष्पराजगढ़ में बड़े हादसे की संभावना बहुत अधिक है। मोटर व्हीकल एक्ट 1988 के प्रावधान स्पष्ट हैं और उनका पालन कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है। इसके साथ ही क्षेत्र में सुरक्षित, नियमनुसार और पर्याप्त वाहनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी जरूरी है। तभी आम नागरिकों की जान जोखिम से बचाई जा सकती है और सड़क परिवहन सुरक्षित औरव्यवस्थित बन सकता है।


