बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ़ हेल्थ साइंसेज में ‘IQAC’ की पहली ऐतिहासिक बैठक संपन्न,
-वाइस चांसलर प्रो. राजीव सूद की अध्यक्षता में हुई अहम चर्चा,

-हेल्थ इंस्टीट्यूशंस के लिए NABH और NABL एक्रेडिटेशन लेने पर दिया गया विशेष ज़ोर,
-यूनिवर्सिटी में चल रहे हैं 4 करोड़ रुपये से ज़्यादा के रिसर्च प्रोजेक्ट्स…
फरीदकोट, 2 जून (अलेक्जेंडर डिसूज़ा): बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ़ हेल्थ साइंसेज, फरीदकोट में ‘इंटरनल क्वालिटी एश्योरेंस सेल’ (IQAC) की पहली अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक सफलतापूर्वक संपन्न हुई। माननीय वाइस चांसलर प्रो. (डॉ.) राजीव सूद की सीधी देखरेख और अध्यक्षता में आयोजित यह मीटिंग ऑफ़लाइन और ऑनलाइन दोनों (हाइब्रिड) माध्यमों से की गई।
क्वालिटी और अकादमिक एक्सीलेंस पर रहा मुख्य फोकस:
बैठक की शुरुआत करते हुए वाइस चांसलर प्रो. (डॉ.) राजीव सूद ने सभी का स्वागत किया। उन्होंने विश्वविद्यालय में गुणवत्ता मानकों को और मजबूत करने, अकादमिक उत्कृष्टता (Academic Excellence), अनुसंधान गतिविधियों (Research Activities) और सुचारू शासन को बढ़ावा देने में IQAC की महत्वपूर्ण भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला।
देश के दिग्गज विशेषज्ञों ने साझा किए बहुमूल्य सुझाव
बैठक के दौरान देश के प्रमुख विशेषज्ञों ने विभिन्न विषयों पर अपनी विशेष प्रस्तुतियां दीं और महत्वपूर्ण सुझाव साझा किए:-
डॉ. ओपी कालरा: इन्होंने “वर्ल्ड यूनिवर्सिटी सस्टेनेबिलिटी (WUS) इम्पैक्ट रैंकिंग” और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) से संबंधित पर्यावरण, सामाजिक और शासन (ESG) सिद्धांतों पर विस्तार से प्रेजेंटेशन दी।
डॉ. अतुल मोहन कोचर: इन्होंने ‘नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स एंड हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स’ (NABH) के महत्व को रेखांकित किया।
डॉ. पंकज जौहरी: इन्होंने ‘नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेटरीज’ (NABL) का परिचय दिया।
विशेषज्ञों का मत: वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि उच्च शिक्षा और स्वास्थ्य संस्थानों में मान्यता (Accreditation) बहुत महत्वपूर्ण है। इसलिए प्रत्येक मेडिकल कॉलेज और प्रयोगशाला को NABH और NABL मान्यता प्राप्त करने का पुरजोर प्रयास करना चाहिए।
बैठक में व्यक्तिगत रूप से शामिल हुए मदन (पूर्व डीन, MDU), डॉ. आर.एस. जॉली (पूर्व डायरेक्टर, I.M.Tech.) और प्रो. विनय कपूर मेहरा (पूर्व वाइस चांसलर, अंबेडकर लॉ यूनिवर्सिटी) ने यूनिवर्सिटी में रिसर्च कल्चर को और मजबूत करने, टीचर्स व स्टूडेंट्स को रिसर्च वर्क के लिए प्रोत्साहित करने और डेटा फैब्रिकेशन (गलत डेटा) को रोकने के लिए सख्त नियम लागू करने की वकालत की।
“क्वांटिटी से ज़्यादा क्वालिटी” में हमारा विश्वास: प्रो. राजीव सूद
वाइस चांसलर प्रो. (डॉ.) राजीव सूद ने कहा कि IQAC यूनिवर्सिटी में क्वालिटी सुधार के लिए एक डायनामिक मैकेनिज्म (गतिशील प्रणाली) के तौर पर काम करेगा। उन्होंने हेल्थ प्रोफेशनल्स में स्किल डेवलपमेंट (कौशल विकास) की आवश्यकता पर बल दिया।
बड़ी उपलब्धि: यूनिवर्सिटी इस समय 4 करोड़ रुपये से अधिक के रिसर्च प्रोजेक्ट्स सफलतापूर्वक चला रही है और पंजाब भर के सैकड़ों इंस्टीट्यूशन्स इससे जुड़े हुए हैं।
NAAC सहित वैश्विक रैंकिंग हासिल करने के लिए यूनिवर्सिटी प्रतिबद्ध
मीटिंग के दौरान प्रो. (डॉ.) सीमा ग्रोवर भट्टी और अन्य सदस्यों ने भी अपने विचार साझा किए। IQAC कोऑर्डिनेटर डॉ. सिंह ने पूरी चर्चा का सारांश प्रस्तुत करते हुए कहा कि यूनिवर्सिटी “क्वांटिटी से ज़्यादा क्वालिटी” के मूल सिद्धांत को बनाए रखते हुए NAAC सहित अन्य राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय एक्रेडिटेशन हासिल करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
बैठक के समापन पर रिसर्च ऑफिसर डॉ. रमनप्रीत कौर ने उपस्थित सभी सदस्यों और विशेषज्ञों का धन्यवाद ज्ञापित किया।
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फोटो: बैठक की ग्रुप फोटो/वाइस चांसलर प्रो. राजीव सूद की अध्यक्षता करते हुए तस्वीर।





