मध्यप्रदेश में पेसा मोबिलाइजर्स की सेवाएं समाप्त
पंचायत राज संचालनालय का बड़ा आदेश, 20 जिलों में तत्काल प्रभाव से सेवामुक्ति के निर्देश
भोपाल/विशेष रिपोर्ट
मध्यप्रदेश के अनुसूचित एवं पेसा क्षेत्रों में कार्यरत ग्राम पंचायत पेसा मोबिलाइजर्स के लिए बड़ा प्रशासनिक फैसला सामने आया है। पंचायत राज संचालनालय, मध्यप्रदेश ने प्रदेश के 20 पेसा जिलों में कार्यरत पेसा मोबिलाइजर्स की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त करने के निर्देश जारी कर दिए हैं। इस आदेश के बाद हजारों युवाओं और कर्मचारियों के सामने रोजगार संकट खड़ा हो गया है।
पंचायत राज संचालनालय द्वारा जारी आदेश क्रमांक 8448 पं.राज/RGSA-83/2026 दिनांक 18 मई 2026 के अनुसार, भारत सरकार द्वारा संचालित आरजीएसए (संशोधित) योजना 31 मार्च 2026 को समाप्त हो चुकी है। योजना के तहत ही पेसा मोबिलाइजर्स का मानदेय स्वीकृत किया जाता था। चूंकि योजना का नया स्वरूप अभी भारत सरकार स्तर पर विचाराधीन है, इसलिए वर्तमान में इन सेवाओं को जारी रखना संभव नहीं बताया गया है।
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इन 20 जिलों में लागू होगा आदेश
आदेश में जिन जिलों का उल्लेख किया गया है उनमें झाबुआ, अलीराजपुर, बड़वानी, मंडला, डिंडौरी, अनूपपुर, धार, खरगोन, रतलाम, खंडवा, बुरहानपुर, नर्मदापुरम, बैतूल, सिवनी, छिंदवाड़ा, बालाघाट, सीधी, शहडोल, उमरिया और श्योपुर शामिल हैं।
इन सभी जिलों के जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे संबंधित ग्राम पंचायतों को तत्काल सूचना जारी कर पेसा मोबिलाइजर्स की सेवाएं समाप्त करने की कार्रवाई सुनिश्चित करें।
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क्या है पूरा मामला?
भारत सरकार के पंचायती राज मंत्रालय द्वारा संचालित राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (RGSA) योजना के अंतर्गत पेसा क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को सशक्त बनाने, जनजागरूकता फैलाने और पंचायत स्तर पर योजनाओं के क्रियान्वयन में सहयोग हेतु पेसा मोबिलाइजर्स की नियुक्ति की गई थी।
इन मोबिलाइजर्स की जिम्मेदारी ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम सभा की बैठकों, सरकारी योजनाओं की जानकारी और पंचायत व्यवस्था को मजबूत करने से जुड़ी थी। लेकिन योजना की समयावधि समाप्त होने के बाद अब इनके मानदेय का प्रावधान भी समाप्त हो गया है।
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आदेश में क्या कहा गया है?
आयुक्त सह संचालक पंचायत राज संचालनालय भोपाल छोटे सिंह द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि:
> “योजना का नवीन स्वरूप भारत सरकार स्तर पर प्रक्रियाधीन है। ऐसी स्थिति में ग्राम पंचायतों के माध्यम से चयनित ग्राम सभा मोबिलाइजर्स की सेवाएं निरंतर रखना संभव नहीं है।”
साथ ही यह भी कहा गया है कि यदि भविष्य में भारत सरकार से कोई नया निर्देश प्राप्त होता है, तो उसके अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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हजारों कर्मचारियों में चिंता
इस आदेश के सामने आने के बाद पेसा क्षेत्रों में कार्यरत मोबिलाइजर्स के बीच भारी असंतोष और चिंता का माहौल है। कई मोबिलाइजर्स का कहना है कि उन्होंने वर्षों तक ग्रामीण क्षेत्रों में काम किया, लेकिन अब बिना वैकल्पिक व्यवस्था के सेवाएं समाप्त कर दी गईं।
कर्मचारियों का यह भी कहना है कि सरकार को नई योजना लागू होने तक अंतरिम व्यवस्था करनी चाहिए थी, ताकि अचानक रोजगार समाप्त न हो।
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राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया संभव
पेसा क्षेत्र आदिवासी बहुल इलाके माने जाते हैं, जहां पंचायत व्यवस्था और ग्राम सभाओं को मजबूत करने के लिए मोबिलाइजर्स की अहम भूमिका रही है। ऐसे में सेवाएं समाप्त होने के बाद ग्रामीण प्रशासन और पंचायत स्तर पर कार्य प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
अब निगाहें भारत सरकार की नई नीति और राज्य सरकार की अगली रणनीति पर टिकी हुई हैं।





