कबाड़ से कमाल तक: उमरिया के युवक ने बना डाली देसी इलेक्ट्रिक साइकिल, अधिकारी भी रह गए हैरान
फैज मोहम्मद रिपोर्टर, उमरिया
नौरोजाबाद से सामने आई हुनर और आत्मनिर्भरता की अनोखी मिसाल
नौरोजाबाद और उमरिया से एक ऐसी प्रेरणादायक खबर सामने आई है, जिसने हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दिया है। जहां एक ओर लोग महंगे पेट्रोल और बढ़ती परिवहन लागत से परेशान हैं, वहीं दूसरी ओर एक गरीब लेकिन हुनरमंद युवक ने अपनी प्रतिभा और मेहनत के दम पर कबाड़ के सामान से शानदार इलेक्ट्रिक साइकिल तैयार कर दी।
इस देसी जुगाड़ और तकनीकी समझ की चर्चा अब पूरे क्षेत्र में हो रही है। खास बात यह है कि युवक ने इस इलेक्ट्रिक साइकिल को बनाने में किसी बड़ी कंपनी, इंजीनियर या बाहरी सहायता का सहारा नहीं लिया, बल्कि पूरी मशीन को अपने दिमाग और मेहनत से तैयार किया।
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कबाड़ बना कमाल की सवारी
युवक ने पुरानी लोहे की सामग्री, खराब बाइक के पार्ट्स, पुरानी बैटरी और अन्य कबाड़ के सामान का उपयोग कर एक आकर्षक और मजबूत इलेक्ट्रिक साइकिल बनाई। देखने में यह साइकिल किसी आधुनिक ई-बाइक से कम नहीं लगती।
ग्रामीणों के अनुसार, युवक कई दिनों से इस मॉडल पर मेहनत कर रहा था। सीमित संसाधनों के बावजूद उसने हार नहीं मानी और आखिरकार ऐसी सवारी तैयार कर दी जो अब लोगों के आकर्षण का केंद्र बन गई है।
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कम खर्च में लंबा सफर
बताया जा रहा है कि युवक ने इस इलेक्ट्रिक साइकिल को बेहद कम खर्च में तैयार किया। परीक्षण के तौर पर वह अपने गांव आगे कोहका से नौरोजाबाद तक पहुंचा और वहां से वापस अपने गांव लौट आया। इस सफर ने साबित कर दिया कि उसकी बनाई साइकिल केवल दिखावे के लिए नहीं, बल्कि व्यवहारिक रूप से भी उपयोगी है।
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अधिकारी भी कर रहे ई-रिक्शा और ऑटो से सफर
इस पूरे मामले में एक और हैरान करने वाली तस्वीर सामने आई। जहां सरकारी अधिकारियों की लग्जरी गाड़ियां खड़ी दिखाई दीं, वहीं कई अधिकारी ई-रिक्शा और ऑटो से सफर करते नजर आए। लोगों के बीच यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि जब आम युवक सीमित संसाधनों में नया आविष्कार कर सकता है, तो समाज में बदलाव की संभावनाएं कितनी व्यापक हैं।
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गांव का कलाकार बना चर्चा का विषय
स्थानीय लोग युवक को “गांव का कलाकार” कहकर बुला रहे हैं। उसकी मेहनत, सोच और तकनीकी समझ ने यह साबित कर दिया कि प्रतिभा किसी सुविधा की मोहताज नहीं होती।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि ऐसे युवाओं को शासन-प्रशासन और समाज का सहयोग मिले, तो वे बड़े स्तर पर नवाचार कर सकते हैं और देश के लिए नई तकनीक विकसित कर सकते हैं।
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युवाओं के लिए प्रेरणा
आज के दौर में जहां युवा मोबाइल और सोशल मीडिया में समय बिताते हैं, वहीं उमरिया जिले के इस युवक ने अपने हुनर से यह संदेश दिया है कि मेहनत, लगन और रचनात्मक सोच से कोई भी व्यक्ति अपनी पहचान बना सकता है।यह खबर केवल एक इलेक्ट्रिक साइकिल की नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता, संघर्ष और ग्रामीण प्रतिभा की उड़ान की कहानी है।
फैज मोहम्मद रिपोर्टर, उमरिया





