फरीदकोट में बड़ा सियासी धमाका,
-म्युनिसिपल काउंसिल चुनाव से पहले ‘आप’ की बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक; कांग्रेस, बीजेपी और अकाली दल के दिग्गज टूटे…



फरीदकोट (अलेक्जेंडर डिसूजा): फरीदकोट की राजनीति में आज उस समय एक बड़ा ‘पॉलिटिकल एटम बम’ फटा, जब नगर परिषद चुनावों की आहट के बीच विपक्षी दलों के बड़े चेहरों ने एक साथ सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (AAP) का दामन थाम लिया। इस घटनाक्रम ने न केवल कांग्रेस के मज़बूत किले में सेंध लगाई है, बल्कि बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल (यूनाइटेड) को भी हाशिए पर धकेल दिया है।
विपक्ष के इन ‘दिग्गजों’ ने थामा झाड़ू:
ऑफिसर्स क्लब में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान इन नेताओं ने आधिकारिक तौर पर ‘आप’ की सदस्यता ग्रहण की। शामिल होने वाले मुख्य चेहरे इस प्रकार हैं:-नरिंदरपाल सिंह निंदा: वर्तमान अध्यक्ष, म्युनिसिपल काउंसिल फरीदकोट।
अमित कुमार ‘जुगनू’ जैन: वर्किंग प्रेसिडेंट जिला कांग्रेस कमेटी एवं सचिव, पंजाब प्रदेश कांग्रेस।
नवीन अरोड़ा: जिला उपाध्यक्ष (बीजेपी) एवं विधानसभा इंचार्ज, फरीदकोट।
सुखजिंदर सिंह सुखी भलवान: जिला अध्यक्ष, शिरोमणि अकाली दल (संयुक्त)।
कांग्रेस के लिए ‘अस्तित्व’ का संकट:
इस दलबदल का सबसे गहरा प्रहार कांग्रेस पर पड़ा है। अमित कुमार जुगनू जैन, जिन्हें पिछले 15 वर्षों से फरीदकोट कांग्रेस का ‘पिलर’ माना जाता था, उनके जाने से पार्टी की स्थानीय लीडरशिप पूरी तरह लड़खड़ा गई है। जुगनू जैन का यूथ कांग्रेस से लेकर ब्लॉक प्रेसिडेंट तक का सफर पार्टी के लिए रीढ़ की हड्डी जैसा था, जो अब टूट चुकी है।
नेताओं ने क्या कहा ?
“मैं बिना किसी राजनीतिक दबाव के, स्वेच्छा से आम आदमी पार्टी में शामिल हुआ हूँ। मेरा एकमात्र लक्ष्य शहर का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित करना है”: नरिंदरपाल सिंह निंदा (अध्यक्ष, म्युनिसिपल काउंसिल)।
“आप सरकार द्वारा बेअदबी के खिलाफ सख्त कानून बनाने, 300 यूनिट मुफ्त बिजली और शिक्षा प्रणाली में क्रांतिकारी सुधारों से प्रभावित होकर मैंने यह फैसला लिया है”: अमित कुमार जुगनू जैन (सीनियर लीडर)।
चुनावी समीकरण: ‘आप’ का पलड़ा भारी:
म्युनिसिपल काउंसिल चुनाव से ठीक पहले हुए इस बड़े ध्रुवीकरण (Polarization) ने विपक्षी खेमे में खलबली मचा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि शहरी क्षेत्रों में पकड़ रखने वाले इन नेताओं के आने से अब ‘आप’ को टक्कर देना मुश्किल होगा। विपक्षी पार्टियों की आपसी फूट और दिग्गजों के पलायन ने रूलिंग पार्टी की राह आसान कर दी है।
निष्कर्ष:
पुराने राजनीतिक गढ़ों के ढहने से फरीदकोट का सियासी मैप बदल गया है। अब देखना यह होगा कि इस जबरदस्त झटके के बाद क्या कांग्रेस और बीजेपी ज़मीनी स्तर पर वापसी कर पाएंगी या नगर परिषद की सत्ता पर ‘झाड़ू’ का पूर्ण वर्चस्व होगा।
न्यूज़: 14-4,
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