ये हैं शहीद भगत सिंह के पोते, मिनिस्टर भी छूते हैं इनका पैर
पानीपत/नई दिल्ली. यादवेन्द्र सिंह शहीद भगत सिंह के पोते हैं। मिनिस्टर हों या आम लोग, हर कोई उनका सम्मान करते हैं। पिछले साल अम्बाला (हरियाणा) पहुंचे यादवेन्द्र का पैर छूकर राज्य सरकार में मंत्री अनिल विज ने भगत सिंह के प्रति आभार जताया था। 23 मार्च को देश में भगत सिंह का शहीदी दिवस मनाया जाता है। बता दें कि इसी दिन भगत सिंह अपने दो साथियों, राजगुरु और सुखदेव के साथ फांसी चढ़ा दिए गए थे। शहीदी दिवस के मौके पर , यस न्यूज़ समाचार टीम – भगत सिंह के पोते की जानकारी दे रहा है। क्या करते हैं यादवेन्द्र सिंह…
– यादवेन्द्र सिंह भगत सिंह के बड़े भाई के पोते हैं। उनके पिता का नाम बब्बर सिंह संधू है।

– यादवेन्द्र, शहीद भगत सिंह ब्रिगेड के प्रेसिडेंट हैं। यह एक संगठन है जो देशभर में भगत सिंह के विचारों का प्रचार-प्रसार करता है।
– संगठन के जरिए यादवेन्द्र शहीदों के परिजनों के अधिकारों की लड़ाई भी लड़ते हैं।
शहादत के बाद परिवार की होती थी जासूसी
– भगत सिंह के पोते सरदार यादवेंद्र सिंह ने दैनिक भास्कर को दिए एक इंटरव्यू में खुलासा किया था।
– उन्होंने बताया था कि नेताजी सुभाषचंद्र बोस के परिवार की ही तरह भारत सरकार की इंटेलिजेंस एजेंसी शहीद भगत सिंह के परिवार की भी जासूसी करती थी।
– खुफिया एजेंसी के अधिकारी भगत सिंह के शहीद होने के बाद उनके परिवार पर नजर रखते थे।
– कई बार तो वे रिसर्च स्कॉलर बताकर आते थे, जानकारी लेते थे और फिर अचानक गायब हो जाते थे।
– यादवेन्द ने 2015 में भोपाल (एमपी) में यह इंटरव्यू दिया था।
भाई पर रखी जाती थी नजर
– उन्होंने बताया था कि परिवार की जासूसी किए जाने का जिक्र खुद भगत सिंह के छोटे भाई कुलबीर सिंह ने कई बार किया है।
– यादवेन्द्र के मुताबिक, 1983 में कुलबीर सिंह की मौत तक जासूसी की गई।
सरकार से क्या डिमांड कर रहे हैं यादवेन्द्र
– शहीदों की स्मृतियों को इकट्ठा कर उनको सहेजने के लिए राष्ट्रीय शहीद संग्रहालय बनाया जाए।
– शहीदों से जुड़ी बातों को स्कूल-कॉलेजों के सिलेबस में शामिल किया जाए।
– हर राज्य के शहीदों की लिस्ट तैयार की जाए ताकि एक राज्य के लोगों को दूसरे राज्य के शहीदों की जानकारी मिल सके।
– नेशनल लेवल पर शहीदों के नाम पर स्कीम्स का नाम रखा जाए।
– शहीदों से जुड़ी बातों को स्कूल-कॉलेजों के सिलेबस में शामिल किया जाए।
– हर राज्य के शहीदों की लिस्ट तैयार की जाए ताकि एक राज्य के लोगों को दूसरे राज्य के शहीदों की जानकारी मिल सके।
– नेशनल लेवल पर शहीदों के नाम पर स्कीम्स का नाम रखा जाए।


