गोहपारू में सिस्टम की क्रूरता ! 45 डिग्री की गर्मी, बूंद-बूंद पानी को तरसते ग्रामीण और कुंभकर्णी नींद में इंजीनियर श्रीनिवास पटेल
संभागीय ब्यूरो विनय द्विवेदी
शहडोल-गोहपारू सूरज आग उगल रहा है, पारा 45 डिग्री के करीब पहुंच रहा है, लेकिन गोहपारू विद्युत वितरण केंद्र के अधिकारियों का दिल नहीं पसीज रहा। ग्राम मलमाथर के मौहर टोला (यादव मोहल्ला) में पिछले एक सप्ताह से पसरा अंधकार अब ग्रामीणों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। बिजली गुल होने से सिर्फ रोशनी ही नहीं छिनी, बल्कि पानी का एक-एक कतरा भी मोहल्ले के लिए दुर्लभ हो गया है।
प्यास से बेहाल हुआ यादव मोहल्लाः नल सूखे, महिलाएं भटक रहीं दर-दर
भीषण गर्मी के इस दौर में बिजली गुल होने का सबसे भयानक असर जल आपूर्ति पर पड़ा है। मोहल्ले के नलकूप और घरों की मोटरें बिजली के अभाव में ‘शो-पीस’ बनकर रह गई हैं। पानी की किल्लत ऐसी है कि ग्रामीणों को इस चिलचिलाती धूप में मीलों दूर जाकर पीने के पानी का इंतजाम करना पड़ रहा है। मवेशी प्यास से तड़प रहे हैं और घर की गृहणियां आधी रात से ही पानी की तलाश में भटकने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि “रोशनी के बिना तो हम जैसे-तैसे रह लेंगे, लेकिन बिना पानी के इस तपती गर्मी में जिंदा रहना नामुमकिन है
इंजिनियर श्रीनिवास पटेल फोन घंटी बजती रही पर साहब का तानाशाही खत्म नहीं होगा
इस पूरी मानवीय त्रासदी के बीच गोहपारू के जूनियर इंजीनियर श्रीनिवास पटेल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि समस्या की शुरुआत से ही ग्रामीण उन्हें दर्जनों बार फोन लगा चुके हैं, लेकिन साहब फोन उठाना अपनी शान के खिलाफ समझते हैं। ग्रामीण फारुख और अन्य निवासियों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि, “हमें लगता है कि इंजीनियर साहब ने हमारा नंबर ‘ब्लैकलिस्ट’ कर दिया है या फिर वे जानबूझकर जनता की तकलीफों को नजरअंदाज कर रहे हैं। जब रक्षक ही भक्षक बन जाए और फोन उठाना बंद कर दे, तो जनता किसके पास जाए
हेल्पलाइन का मखौल: 1912 और CM हेल्पलाइन सिर्फ कागजी खिलौने !
हैरानी की बात यह है कि ग्रामीणों ने डिजिटल इंडिया के तमाम दावों यानी CM हेल्पलाइन और 1912 का भी दरवाजा खटखटाया। शिकायतें दर्ज हुईं, लेकिन समाधान शून्य रहा। ऐसा लगता है कि गोहपारू बिजली विभाग ने खुद को इन सभी जवाबदेहियों से ऊपर मान लिया है। नियमित बिजली बिल भरने वाले उपभोक्ताओं के साथ यह बर्ताव न केवल अन्यायपूर्ण है, बल्कि उनके मानवाधिकारों न भी है
कलेक्टर-कमिश्नर तक पहुंची व्हाट्सएप शिकायतः अब आर-पार की लड़ाई
स्थानीय स्तर पर इंजीनियर की घोर लापरवाही को देखते हुए जागरूक ग्रामीणों ने अब शहडोल जिले के आला अधिकारियों की शरण ली है। कलेक्टर शहडोल, कमिश्नर, एसडीएम और तहसीलदार को व्हाट्सएप पर भेजे गए शिकायती संदेशों में ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि वे अब और बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने प्रशासन को अल्टीमेटम दिया है कि यदि अगले 24 घंटे में बिजली बहाल नहीं हुई और पानी की समस्या दूर नहीं की गई, तो पूरा मोहल्ला सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेगा।
कड़वे सवालः जिसका जवाब जनता चाहती है
1. क्या शासन-प्रशासन ऐसे इंजीनियरों पर कार्रवाई करेगा जो संकट के समय जनता का फोन नहीं उठाते
2. नियमित बिल जमा करने के बाद भी ग्रामीण प्यासे क्यों मर रहे हैं?
3. क्या CM हेल्पलाइन की शिकायतों का कोई मोल नहीं रह गया है





