Ad imageAd image
d84ef9efc3d53b57ca3a957694261ad58b2c2b9e

मिट्टी, आकाश और चिता ‘: केन नदी में आदिवासियों का महासत्याग्रह; भूख हड़ताल के दूसरे दिन ‘मिट्टी सत्याग्रह’ से हिला प्रशासन

admin
2 Min Read
इस खबर को शेयर करें

 

‘मिट्टी, आकाश और चिता ‘: केन नदी में आदिवासियों का महासत्याग्रह; भूख हड़ताल के दूसरे दिन ‘मिट्टी सत्याग्रह’ से हिला प्रशासन

 

*छतरपुर/पन्ना (मध्यप्रदेश):

- Advertisement -
Ad imageAd image

* केन-बेतवा लिंक परियोजना के विस्थापितों का धैर्य आज जवाब दे गया। आंदोलन के 9वें दिन और सामूहिक भूख हड़ताल के 48वें घंटे में प्रवेश करते ही, *’चिता आंदोलन’* ने *’मिट्टी सत्याग्रह’* का रौद्र रूप धारण कर लिया है। आज सुबह हजारों आदिवासियों ने—जिनमें महिलाएं और छोटे बच्चे भी शामिल थे—केन नदी की गीली मिट्टी को अपने पूरे शरीर पर लपेट लिया और “जल, जंगल, जमीन” के नारों के साथ जलधारा में मोर्चा संभाल लिया।

 

*आज की घटनाएं:*

 

*• मिट्टी सत्याग्रह :* आंदोलनकारियों ने शरीर पर मिट्टी मलकर यह संदेश दिया कि वे इस जमीन के मूल मालिक हैं। बुजुर्गों ने भावुक होकर कहा, *”अगर हमें हमारी जमीन से हमें बिना न्याय दिए बेदखल किया गया, तो हम इसी मिट्टी में दफन होना पसंद करेंगे।”*

- Advertisement -
Ad imageAd image

*•आकाश सत्याग्रह :* तपती धूप और खुले आसमान के नीचे, बिना अन्न ग्रहण किए हजारों विस्थापितों ने जमीन पर लेटकर ‘आकाश सत्याग्रह’ जारी रखा। भूख की वजह से कई महिलाओं की हालत गंभीर बनी हुई है।

 

*अमित भटनागर (जय किसान संगठन) का तीखा प्रहार:*

“आज 9वें दिन प्रशासन की चुप्पी ने साबित कर दिया है कि उन्हें गरीब आदिवासियों की जान की कोई कीमत नहीं है। हमारे चूल्हे 48 घंटों से ठंडे हैं। यह मिट्टी सत्याग्रह उस तानाशाही के खिलाफ है जो नियम और कानूनों (धारा 11, 15, 18) को ताक पर रखकर हमें उजाड़ना चाहती है। यदि आज रात तक किसी उच्चाधिकारी ने ठोस कार्यवाही/निर्णय नहीं दिया, तो यह आंदोलन और उग्र हो जाएगा।”

 

हजारों की संख्या में आदिवासी महिलाएं, किसान रहे शामिल

 

*मीडिया सेल*

*जय किसान संगठन*

Share This Article
Leave a Comment