उस दिन थाना कत्लखाना बन गया था। और ये पुलिस वाले यमदूत। आखिर जयवीर और बेनिक्स का कसूर क्या था?
बात 19, जून 2020 की है। देश में लॉकडाउन लगा था। अफरातफरी और डर का माहौल था। तमिलनाडु के मदुरै में जयराम और उनका बेटा बेनिक्स को अपनी दुकान बंद करते करते 15 मिनट की देरी हो गई।

इसी बात पर कुछ पुलिस वाले जयराम और बेनिक्स को थाने ले गए।
इसके बाद शुरू हुआ तांडव। पुलिस कर्मियों ने थाने में जयराम और बेनिक्स की पिटाई शुरू की। एक छोटी सी गलती पर दो दिन तक लगातार पीटते रहे।
बाहर कोरोना का कहर था। इधर थाने के अंदर भयंकर पिटाई से जयराम और उनके बेटे बेनिक्स की 22 और 23 जून को मौत हो गई।
मामला कोर्ट पहुंचा। कोर्ट ने इसे दुर्लभ से दुर्लभतम केस माना। और सख्त संदेश देते हुए इंस्पेक्टर एस श्रीधर सहित 8 पुलिस कर्मियों को फांसी की सजा सुना दी। एक आरोपी की पहले ही मौत हो चुकी है।
साथ ही मृतकों के परिजनों को एक करोड़ 40 लाख रुपये देने का आदेश दिया। ये मुआवजा इन्हीं आरोपी पुलिस वालों से वसूला जायेगा।
ये रकम वसूलने के लिए अदालत ने पुलिस वालों की सैलरी स्लिप और संपत्ति का ब्यौरा तक मंगा लिया। ऐसा शायद पहली बार हुआ।
अदालत ने सख्त संदेश दिया कि नागरिकों के साथ गुलामों जैसा व्यवहार बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं होगा।
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