कलेक्टर श्री हर्षल पंचोली एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रीमती अर्चना कुमारी के निर्देशन में किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में कृषि क्षेत्र में तकनीकी विस्तार तथा फसलों को परजीवी खरपतवारों से बचाने के उद्देश्य से विकासखंड पुष्पराजगढ़ के ग्राम बिजोरा में एक दिवसीय किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

प्रशिक्षण के मुख्य वक्ता कृषि वैज्ञानिक सूर्यकांत नागरे ने किसानों को संबोधित करते हुए अमरबेल (Cuscuta) के वैज्ञानिक नियंत्रण पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अमरबेल एक पूर्ण स्तंभ परजीवी खरपतवार है, जो मुख्य फसल से पोषक तत्वों को अवशोषित कर उसकी वृद्धि और उत्पादन पर गंभीर प्रभाव डालती है।
कार्यक्रम में किसानों को अमरबेल नियंत्रण के विभिन्न उपाय भी बताए गए। किसानों को सलाह दी गई कि बुवाई से पहले बीजों की अच्छी तरह सफाई करें ताकि अमरबेल के बीज फसल के बीजों के साथ न मिलें। साथ ही अमरबेल से प्रभावित पौधों को समय रहते खेत से उखाड़कर नष्ट करने तथा वैज्ञानिकों की अनुशंसा अनुसार सही मात्रा में शाकनाशी का प्रयोग करने की जानकारी दी गई। प्री-इमरजेंसी में पेंडिमेथालीन (Pendimethalin) का प्रयोग बीजबुवाई के बाद और पौधों के उगने से पहले करें। तथा पोस्ट-इमरजेंसी में ग्लाइफोसेट (Glyphosate) का प्रयोग पहले से उग चुके खरपतवारों के नियंत्रण के लिए करें।
इस अवसर पर वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी दान सिंह पट्टा ने किसानों को कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं एवं मिलने वाली सहायता के बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम की अध्यक्षता ग्राम पंचायत बिजोरा की सरपंच फूल बाई ने की। उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर खेती को लाभकारी बनाया जा सकता है।
प्रशिक्षण में ग्राम बिजोरा एवं आसपास के क्षेत्रों के बड़ी संख्या में प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया। किसानों ने अमरबेल की समस्या से संबंधित अपनी शंकाओं का समाधान कृषि वैज्ञानिकों से प्राप्त किया। कार्यक्रम के अंत में किसानों को उन्नत खेती के प्रति जागरूक रहने और आधुनिक तकनीकों को अपनाने का संकल्प दिलाया गया।
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