ब्यूरोक्रेसी के आगे बेबस मान सरकार! नरेगा कर्मचारियों को पक्का करने के बजाय मिली नौकरी से निकालने की धमकी, संघर्ष तेज़…

फरीदकोट, 9 जुलाई (अलेक्जेंडर डिसूज़ा): राज्य में 70,000 नई नौकरियां देने का दावा करने वाली भगवंत मान सरकार का झूठ तब सामने आ गया, जब ग्रामीण विकास और पंचायत विभाग के बड़े अधिकारियों ने पिछले 18 सालों से टेम्पररी पदों पर काम कर रहे नरेगा कर्मचारियों को रेगुलर करने से साफ़ मना कर दिया।
अपनी सेवाओं को विभाग में मर्ज करके रेगुलर करने की मांग को लेकर नरेगा कर्मचारी पिछले 37 दिनों से लगातार धरने पर बैठे हैं। आज यहाँ जिला परिषद फरीदकोट में पत्रकारों से बात करते हुए नरेगा कर्मचारी यूनियन के जिला अध्यक्ष हरपिंदर सिंह, ब्लॉक अध्यक्ष हरबंस सिंह, खुशप्रीत सिंह और बलराज सिंह ने सरकार और ब्यूरोक्रेसी के रवैये पर कड़ा रोष जताया।
“सरकार का ब्यूरोक्रेसी पर कोई कंट्रोल नहीं, मंत्री भी बेबस दिखे”:
यूनियन नेताओं ने बताया कि 1 जून, 10 जून और 2 जुलाई को पंचायत मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद और वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा के साथ हुई पैनल मीटिंग में कैबिनेट मंत्रियों ने कर्मचारियों की सभी मांगों को जायज माना था। सरकार ने पंचायत विभाग के उच्च अधिकारियों को 7 जुलाई की मीटिंग में शामिल होने के निर्देश दिए थे, लेकिन इस मीटिंग के दौरान ब्यूरोक्रेसी कर्मचारियों को रेगुलर करने के वादे से पूरी तरह मुकर गई।
नेताओं ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पंजाब सरकार का ब्यूरोक्रेसी की मनमानी पर कोई कंट्रोल नहीं है। मीटिंग के दौरान पंचायत मंत्री खुद अपने विभाग के अधिकारियों के सामने बेबस दिखे। 18 साल से गांवों के विकास में अहम योगदान देने वाले कर्मचारियों को रेगुलर करने और 8 महीने की बकाया सैलरी देने के बजाय अब नौकरी से निकालने की धमकी दी जा रही है।
प्रभावित कर्मचारियों के अनुसार, मंत्री सौंद ने उन्हें धमकी देते हुए कहा कि अगर हड़ताल खत्म नहीं की गई, तो उन्हें नौकरी से निकालकर नए सिरे से भर्ती कर ली जाएगी। इस बयान से पूरे पंजाब के नरेगा कर्मचारियों में भारी आक्रोश है। कर्मचारियों का कहना है कि पहले अकाली-बीजेपी और कांग्रेस ने उन्हें राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल किया और अब ‘बदलाव’ का नारा देकर सत्ता में आई आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार भी पूरी तरह से कर्मचारी विरोधी साबित हुई है।
आर-पार की लड़ाई: संघर्ष तेज़ करने का बड़ा ऐलान
ब्यूरोक्रेसी और सरकार के इस अड़ियल रवैये के बाद सभी MGNREGA कर्मचारियों ने मिलकर कड़े संघर्ष का बिगुल फूंक दिया है और आगामी दिनों के लिए निम्नलिखित प्रदर्शनों का ऐलान किया है:-
10 जुलाई पंजाब के सभी जिला परिषद ऑफिस के सामने पंजाब सरकार के पुतले जलाए जाएंगे।
12 जुलाई मुख्यमंत्री भगवंत मान के बैंगलोर से लौटने के बाद, नरेगा कर्मचारी उनके हर ‘लोक मिलानी’ प्रोग्राम में जाकर सीधे सवाल पूछेंगे।
15 जुलाई खन्ना में पंचायत मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद के घर का घेराव करने के लिए हज़ारों कर्मचारी जुटेंगे और बड़ी विरोध रैली निकाली जाएगी।
इस मौके पर जिले के सभी नरेगा कर्मचारी और यूनियन नेता बड़ी संख्या में मौजूद रहे, जिन्होंने सरकार के ख़िलाफ़ आर-पार की लड़ाई लड़ने का संकल्प लिया।
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