ग़ज़ल सम्राट पंकज उदास के 75वें जन्मदिन पर सुर-आंगन ने सजाई ‘शाम-ए-ग़ज़ल’
कलाकारों, कवियों और संगीत प्रेमियों ने गीतों और ग़ज़लों के ज़रिए महान गायक को दी भावभीनी श्रद्धांजलि,

-साहित्य और संगीत को समर्पित इलाके की जानी-मानी संस्था ‘सुर-आंगन’ द्वारा महान ग़ज़ल गायक पंकज उदास के 75वें जन्मदिन के मौके पर एक विशेष श्रद्धांजलि कार्यक्रम ‘शाम-ए-ग़ज़ल’ का शानदार आयोजन किया गया। इस यादगार शाम में बड़ी संख्या में पहुंचे कलाकारों, कवियों और संगीतकारों ने अपनी बेहतरीन प्रस्तुतियों के ज़रिए दिवंगत गायक को याद किया।
दीप प्रज्वलन से हुई शुरुआत
कार्यक्रम का आगाज़ सुर-आंगन के संचालक, मशहूर कवि व संगीतकार प्रिंसिपल डॉ. राजेश मोहन और अन्य सीनियर कलाकारों ने संयुक्त रूप से दीप जलाकर किया। इसके बाद इंस्टीट्यूट की छात्राओं-सिमरन, नवरीति और साथियों ने बेहद खूबसूरत अंदाज़ में ‘सुर-आंगन धुनी’ का गान किया।
दिग्गजों के बीच बनाई अपनी अलग पहचान:
इवेंट में मुख्य रूप से पहुंचे महान गीतकार सत्यदेव ने पंकज उदास की अनूठी गायकी और उसकी बारीकियों पर विस्तार से रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि जिस दौर में मेहंदी हसन, गुलाम अली और जगजीत सिंह जैसे सुरों के शहंशाह छाए हुए थे, उस दौर में भी पंकज उदास ने अपनी सरल और सीधी गायकी से आम दर्शकों, खासकर युवाओं के दिलों में अपनी एक अलग और अमिट जगह बनाई।टी
इस मौके पर डॉ. राजेश मोहन ने पंकज उदास के जीवन सफर और संगीत जगत में उनके योगदान की चर्चा की। उन्होंने बताया कि गुजरात से ताल्लुक रखने वाले ये तीनों भाई संगीत प्रेमी थे और उनके बड़े भाई मनहर उदास ने भी बॉलीवुड में एक बड़ा मुकाम हासिल किया। डॉ. मोहन ने पंकज उदास की सदाबहार ग़ज़लों जैसे ‘चांदी जैसा रंग है तेरा’, ‘चिट्ठी आई है’, ‘मोही आई ना जग से लाज’, ‘आप जिनके करीब होते हैं’ और ‘ना कजरे की धार’ की लोकप्रियता और उनके म्यूजिकल एल्बम्स का विशेष रूप से ज़िक्र किया।
म्यूजिकल परफॉर्मेंस ने बांधा समां:”
शाम ढलने के साथ ही सुरों की महफ़िल रंग पकड़ती गई:
नाम्या अरोड़ा ने पंकज उदास का बेहद लोकप्रिय गाना ‘जीएं तो जीएं कैसे’ गाकर दर्शकों को भावुक कर दिया।
माधव अरोड़ा ने ‘चांदी जैसा रंग है तेरा’ पेश कर खूब वाहवाही लूटी।
हरप्रीत शायर ने अपनी बेहतरीन ग़ज़ल से महफ़िल में समां बांधा।
उभरते हुए ग़ज़ल गायक दुष्यंत कविया ने उस्ताद गुलाम अली की मशहूर रचना ‘हमको किसके गम ने मारा’ और सीनियर आर्टिस्ट सरबजीत ने महेंदी हसन की ग़ज़ल गाकर कार्यक्रम को चरम पर पहुंचा दिया।
इस दौरान मंच पर साहिल टैगोरिया और हरजीत सिंह ने तबले पर लाजवाब जुगलबंदी कर संगत दी।
डॉ. राजेश मोहन की ग़ज़ल के साथ समापन:
कार्यक्रम के आखिरी पड़ाव में हर्षवर्धन ने डॉ. राजेश मोहन द्वारा रचित खूबसूरत ग़ज़ल ‘शायर कह कमाल दा नगमा बनालिया’ पेश की, जिसे सुनकर दर्शक झूम उठे।
इस गरिमामयी शाम के मौके पर रघु अरोड़ा, श्री सुभाष अरोड़ा, प्रोफेसर गुरसेवक सिंह, कुलविंदर कामिल समेत सुर-आंगन के कई विद्यार्थी और शहर की गणमान्य शख्सियतें मौजूद रहीं।
रिपोर्ट: अलेक्जेंडर डिसूज़ा।
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