फरीदकोट: ‘सुर-आंगन’ ने सुनीता कुमारी की स्मृति में सजाई ‘शाम-ए-फिराक’
साहित्यिक और संगीत की लहरों के बीच दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि; नामचीन शायरों और कलाकारों ने बांधा समां…

फरीदकोट 11 मई (अलेक्जेंडर डिसूज़ा): स्थानीय देशभक्त पंडित चेतन देव गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ़ एजुकेशन में ‘सुर-आंगन’ संस्था द्वारा एक विशेष साहित्यिक एवं संगीत संध्या ‘शाम-ए-फिराक’ का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम श्रीमती सुनीता कुमारी की मीठी यादों को समर्पित था। इस गरिमामयी महफिल में मुख्य अतिथि के रूप में मोहम्मद फैयाज़ फारूकी ने शिरकत की।
शमा रोशन के साथ हुआ आगाज:
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि के साथ प्रिंसिपल डॉ. राजेश मोहन, प्रख्यात कवि प्रो. गुरतेज कोहरवाला, श्री विजय विवेक, मुसव्विर फिरोजपुरी और पत्रकार अमित कविया ने दीप प्रज्वलित कर किया। सभी गणमान्य हस्तियों ने श्रीमती सुनीता कुमारी की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धा सुमन भेंट किए। इस भावुक पल में म्यूजिक टीचर सुखविंदर सारंग ने सुनीता जी के विद्यार्थियों के प्रति उनके स्नेहपूर्ण व्यवहार को याद किया।
संगीत की मधुर लहरें और मनमोहक प्रस्तुतियां:
इवेंट में शास्त्रीय और सुगम संगीत का अनूठा संगम देखने को मिला:-
वादन: टैलेंटेड आर्टिस्ट हर्षवर्धन, माधव अरोड़ा और उनके साथियों ने ‘सुर-आंगन धुन’ पेश की। वहीं हरियाणा से विशेष रूप से पधारे एस. सतपाल गिलोत्रा ने सितार पर राग यमन कल्याण और ‘दो पल बहिजा मेरे कोल वे’ की मधुर तान छेड़कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
गायन: अर्श कविया ने ‘माहिया मानू याद आंवदा’ और प्रिंसिपल हरजीत सिंह ने डॉ. राजेश मोहन की ग़ज़ल ‘जिसकी मंज़िल थी जहाँ पर’ को अपनी आवाज़ दी। दुष्यंत कविया ने फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की अमर रचना ‘गुलों में रंग भर’ पेश की।
विशेष आकर्षण: सरबजीत सांवली ने महफ़िल का टाइटल सॉन्ग ‘शाम-ए-फ़िराक़ अब ना पूछ’ गाकर समां बांध दिया, जबकि प्रो. अरुणा रणदेव ने मदर्स डे को समर्पित गीत पेश कर सबको भावुक कर दिया।
मुशायरे ने छोड़ी अमिट छाप
कार्यक्रम के दूसरे चरण में शानदार मुशायरा आयोजित किया गया, जिसका संचालन डॉ. राजेश मोहन ने किया। इसमें मुसव्वर फिरोजपुरी, विजय विवेक और गुरतेज कोहरवाला ने अपनी बेहतरीन शायरी से श्रद्धांजलि दी। महफ़िल के सदर मोहम्मद फारूकी के उर्दू कलाम ने दर्शकों की खूब वाहवाही बटोरी। उनका यह शेर विशेष रूप से चर्चा में रहा:
‘हर बुराई की जगह हम खड़े हैं, गुनाह की दुनिया में हम खड़े हैं ग़ज़लों के साथ’
इनकी रही गरिमामयी मौजूदगी:
कार्यक्रम के समापन पर डॉ. राजेश मोहन ने अपनी ग़ज़लों से सबका आभार व्यक्त किया। मंच पर संगत देने वाले कलाकारों में साहिल टैगोरिया (तबला), रितेश रोनी और दुष्यंत (गिटार) शामिल थे। इस अवसर पर जिला भाषा अधिकारी मंजीत पुरी, प्रो. दलबीर सिंह, प्रो. गुरसेवक सिंह, डॉ. निर्मल कौशिक, रघु अरोड़ा और कुलविंदर सिंह सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे। मंच का कुशल संचालन दलजीत साज़ ने अपने विशिष्ट शायराना अंदाज़ में किया।
न्यूज़: 11-3,
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