मध्यप्रदेश राजगढ़
दलित परिवार की बिंदोली रोकने का आरोप, भीम आर्मी ने प्रशासन से मांगी सुरक्षा
लिम्बोदा गांव में सामाजिक भेदभाव का मामला गरमाया, संविधान और बराबरी के अधिकार पर उठे सवाल
राजगढ़ जिले के लिम्बोदा गांव में दलित समाज के एक परिवार की बिंदोली रोकने के आरोप ने पूरे इलाके में चर्चा और आक्रोश का माहौल बना दिया है। आरोप है कि गांव के कुछ दबंग और सामंतवादी मानसिकता के लोगों ने दलित परिवार को घोड़ी पर बैठकर डीजे के साथ बिंदोली निकालने से रोकने का प्रयास किया। घटना के सामने आने के बाद सामाजिक भेदभाव और जातिगत मानसिकता को लेकर प्रशासन और सरकार पर सवाल खड़े होने लगे हैं।
पीड़ित परिवार का कहना है कि उन्हें लगातार डराया-धमकाया जा रहा है। परिवार ने आरोप लगाया कि गांव में सामाजिक बहिष्कार जैसी स्थिति बनाई जा रही है, हुक्का-पानी बंद करने की धमकियां दी जा रही हैं और कई घरों में ताले लगाए जाने जैसी घटनाएं भी सामने आई हैं। परिवार ने इसे सामाजिक दबाव और मानसिक प्रताड़ना बताया है।
मामले को लेकर भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी के नेता पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे और पीड़ित परिवार की सुरक्षा की मांग की। भीम आर्मी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुनील अस्तेय ने कहा कि संविधान सभी नागरिकों को समानता और सम्मान के साथ जीवन जीने का अधिकार देता है, लेकिन आज भी दलित समाज को अपने मौलिक अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि यह मामला इसलिए भी गंभीर हो जाता है क्योंकि लिम्बोदा गांव भाजपा जिला अध्यक्ष ज्ञानसिंह गुर्जर का गांव बताया जा रहा है। इसके बावजूद यदि पीड़ित परिवार खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है, तो यह प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
भीम आर्मी ने मध्यप्रदेश सरकार, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, राजगढ़ कलेक्टर और पुलिस प्रशासन से सवाल पूछते हुए कहा कि क्या आज भी दलित समाज का व्यक्ति घोड़ी पर नहीं बैठ सकता? क्या संविधान केवल किताबों तक सीमित रह गया है?
संगठन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि बहन लक्ष्मी और छोटे प्रकाश की बिंदोली पूरे सम्मान, सुरक्षा और धूमधाम के साथ निकाली जाएगी। साथ ही अन्याय और भेदभाव के खिलाफ संघर्ष जारी रखने की बात भी कही गई है।





