ब्यौहारी, मध्य प्रदेश, 20 अप्रैल 2026:
यस न्यूज़ प्रतिनिधि विनय द्विवेदी की रिपोर्ट (94247 77542)
*बिरसा मुंडा मेडिकल कॉलेज शहडोल बना ‘अखाड़ा’, नर्सिंग स्टाफ ने गुंडे बुलाकर घायल के परिजनों को धमकाया*
शहडोल। संभाग के सबसे बड़े स्वास्थ्य केंद्र, बिरसा मुंडा मेडिकल कॉलेज में मानवता को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ एक घायल मरीज का इलाज करने के बजाय, नर्सिंग स्टाफ राजू द्वारा स्वयं एवं मेडिकल कॉलेज की गार्ड को बुलाकर परिजनों के साथ मारपीट और बदसलूकी करवाने का सनसनीखेज आरोप लगा है।
खुशियों के घर में मातम और ऊपर से अस्पताल की ‘गुंडागर्दी’
घटना बीती देर रात की है। संजय यादव (पप्पू) अपनी बहन की शादी के कार्ड बांटने निकले थे, तभी सड़क हादसे में वे गंभीर रूप से घायल हो गए। लहूलुहान हालत में उनके साले शिव यादव और अन्य परिजन उन्हें लेकर बिरसा मुंडा मेडिकल कॉलेज पहुँचे। परिजनों को उम्मीद थी कि यहाँ उनके भाई को जीवनदान मिलेगा, लेकिन उन्हें क्या पता था कि यहाँ उनका सामना ‘सफेदपोश गुंडागर्दी’ से होगा।
दवाई मांगी तो नर्सिंग स्टाफ ‘राजू’ ने बुला लिया अपना ‘गैंग’
शिकायत के अनुसार, जब शिव यादव ने ड्यूटी पर तैनात नर्सिंग स्टाफ राजू से घायल के लिए जरूरी दवाइयां और इलाज की मांग की, तो राजू भड़क गया। बात सिर्फ बहस तक सीमित नहीं रही; आरोप है कि राजू ने फोन करके बाहर से अपने कुछ जान-पहचान के ‘गार्ड को अस्पताल परिसर में बुला लिया। गार्ड ने भी लोगों से अभद्रताः इन बाहरी लड़कों ने अस्पताल के भीतर परिजनों को घेरकर उनके साथ बदतमीजी की और डराया-धमकाया।
वीडियो बनाने पर हमलाः जब परिजनों ने इस पूरी करतूत का वीडियो बनाना चाहा, तो स्टाफ और उसके बुलाए गए लड़कों ने मिलकर मोबाइल छीनने और मारपीट करने की कोशिश की।
कानून के घेरे में नर्सिंग स्टाफः थाना सुहागपुर में शिकायत
इस पूरी घटना के बाद पीड़ित शिव यादव ने थाना सोहागपुर में लिखित आवेदन देकर अपनी और अपने परिवार की जान को खतरा बताया है। उन्होंने मांग की है किः
1. नर्सिंग स्टाफ राजू को तत्काल निलंबित किया जाए।
2. अस्पताल में अवैध रूप से घुसकर परिजनों को धमकाने वाले बाहरी लड़कों पर एफआईआर दर्ज हो।
3. अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जाएं ताकि सच सामने आ सके।
प्रशासनिक मौन पर उठते सवाल
बिरसा मुंडा मेडिकल कॉलेज में राजू व उनके स्टाफ द्वारा घायल के परिजनों को धमकी दे डाली सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े करता है। क्या अब अस्पताल में इलाज कराने के लिए मरीजों को गुंडों का सामना करना पड़ेगा


