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PAU रीजनल रिसर्च सेंटर फरीदकोट में बड़ा किसान मेला लगा;

Alexander D’Souza
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PAU रीजनल रिसर्च सेंटर फरीदकोट में बड़ा किसान मेला लगा;
-स्पीकर संधवा ने किसानों को ‘एग्री-बिज़नेस’ अपनाने के लिए बुलाया…
फरीदकोट (अलेक्जेंडर डिसूज़ा): पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी (PAU) लुधियाना ने आज रीजनल रिसर्च सेंटर फरीदकोट में ‘खेती की अलग-अलग तरह की चीज़ें अपनाएं, कीमती पर्यावरण बचाएं’ नारे के साथ ज़िला लेवल का किसान मेला कामयाबी से लगाया। इस मेले में हज़ारों किसानों और किसान महिलाओं ने हिस्सा लिया। पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवा इस फंक्शन में चीफ गेस्ट के तौर पर शामिल हुए, जबकि फरीदकोट के MLA गुरदित सिंह सेखों स्पेशल गेस्ट के तौर पर शामिल हुए।
किसानों को सोशल मीडिया के बजाय एक्सपर्ट्स की सलाह माननी चाहिए: स्पीकर संधवा
किसानों की एक बड़ी भीड़ को संबोधित करते हुए स्पीकर कुलतार सिंह संधवा ने कहा कि खेती दुनिया का सबसे अच्छा प्रोफेशन है, लेकिन आज के समय में किसानों को सिर्फ़ फ़सल उगाने तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे ‘एग्री-बिज़नेस’ और खेती पर आधारित छोटे उद्योगों की ओर कदम बढ़ाएं ताकि वे अपनी उपज का सही दाम खुद तय कर सकें। उन्होंने खास तौर पर कहा कि किसानों को सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही गुमराह करने वाली जानकारी के बजाय PAU के वैज्ञानिकों की सलाह को प्राथमिकता देनी चाहिए।
साइंटिफिक खेती और मेलों का महत्व:
एमएलए गुरदीत सिंह सेखों ने कहा कि किसान मेले वैज्ञानिकों और किसानों के बीच एक मजबूत कड़ी का काम करते हैं। इनके ज़रिए किसानों को नए बीजों, खादों के सही इस्तेमाल और कीड़ों से बचाव के बारे में सही टेक्निकल जानकारी मिलती है।
यूनिवर्सिटी द्वारा नई किस्मों की प्रेजेंटेशन:
PAU के वाइस-चांसलर डॉ. सतबीर सिंह गोसल ने खरीफ फसलों की नई किस्मों और मार्केटिंग टिप्स शेयर किए। उन्होंने भरोसा दिलाया कि यूनिवर्सिटी किसानों की समस्याओं को हल करने के लिए हमेशा तैयार है। इंटरनेशनल चावल वैज्ञानिक डॉ. गुरदेव सिंह खुश ने भी सब्जी और फलों की खेती के ज़रिए डायवर्सिफिकेशन पर ज़ोर दिया।
मेले के मुख्य आकर्षण:
बेहतर बीजों का वितरण: किसानों को खरीफ फसलों के बेहतर बीज और सब्जियों की किट दी गईं।
प्रदर्शनियां: नई खेती की मशीनरी और तकनीकों की लगभग एक दर्जन प्रदर्शनियां लगाई गईं। मौके पर ही समाधान: खेती के जानकारों ने किसानों के सवालों के जवाब दिए और मौके पर ही खेती की समस्याओं का समाधान बताया।
सांस्कृतिक रंग: किसानों के मनोरंजन के लिए लोक नृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी पेश किए गए।
इस मौके पर डॉ. कुलदीप सिंह (डायरेक्टर रीजनल रिसर्च सेंटर), डॉ. अजमेर सिंह धत्त, और डॉ. तेजिंदर सिंह रियार समेत कई लोग मौजूद थे।
न्यूज़: 18-1,
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