उभरते हुए राइटर और लिरिसिस्ट तेजिंदर सिंह ने अपने गाने “दा कॉन्शियस” “आंखियां” से ऑडियंस के बीच खूब नाम कमाया है।

“दा कॉन्शियस” योद्धा रिकॉर्ड्स की पहली और गर्व करने वाली पेशकश है। गाने के राइटर, कंपोजर और सिंगर खुद तेजिंदर सिंह हैं। तेजिंदर सिंह बॉलीवुड टाइप के प्रोग्रेसिव और ऊंचे शुद्ध विचारों की पहचान हैं। विजुअल को सबूत की ज़रूरत नहीं है, उनकी पहली परफॉर्मेंस से ही साफ है कि वे समाज को सेल्फ-रिस्पेक्ट और ऊंचे कैरेक्टर के साथ जीने की गाइड करते हैं जो हमारी ज़िंदगी जीने के लिए सबसे ज़रूरी हैं। गाने को मशहूर संगीतकार दलजीत फरीदकोटी रॉक फ्यूजन ने अपने म्यूजिक से सजाया है। सिंगर और संगीतकार इस हाई-क्वालिटी शानदार परफॉर्मेंस के लिए बधाई के हकदार हैं। तेजिंदर सिंह के लिए यह भी गर्व की बात है कि उन्हें उनकी नेक सलाह के लिए इंटरनेशनल लिटरेरी और कल्चरल सीनियर पंजाबी फोक सिंगर बलधीर माहला का पूरा सपोर्ट मिला है।
ऊँची सोच और सेल्फ-रिस्पेक्ट:
“असूल बड़े अथरे ते सोच रखी लाउड ए…”
“मिहन्ता दी खाने आ बेगानी कदे तक्की नी…”
रिव्यू: गाने की शुरुआत एक मज़बूत कैरेक्टर से होती है। राइटर कहता है कि उनकी ज़िंदगी के नियम (उसूल) बहुत सख़्त और अनोखे हैं। वे किसी का मुफ़्त का खाना खाने में यकीन नहीं रखते, बल्कि अपनी हक़ की कमाई और मेहनत पर गर्व करते हैं। ये लाइनें आज की पीढ़ी को आत्मनिर्भर और ईमानदार बनने का मैसेज देती हैं।
2.निरपख यारी अते भाईचारा
“गड्डी विच बैठा नाल यारा दा क्राउड ए…”
यारा दे टोले च कोई कैटेगरी रखी नहीं…”
रिव्यू: यहाँ दोस्ती की असली डेफ़िनिशन है। राइटर के मुताबिक, उनके दोस्तों के ग्रुप में अमीर-गरीब, जाति-पाँति या ऊँच-नीच जैसी कोई “कैटेगरी” (बँटवारा) नहीं है। सब बराबर हैं। यह आज के समाज में बराबरी और सच्ची दोस्ती का एक अच्छा उदाहरण है।
इंकलाबी सोच अते धार्मिक आस्था
“लग्गी लॉबी विच फोटो तीर वाले बाबे दी,जेहडी सुत्तिया ज़मीरा नू जगाए बल्लीए…”
रिव्यू: यह गाने का सबसे शानदार हिस्सा है। “तीर वाले बाबा” (संत जरनैल सिंह भिंडरावाले) और देशभक्त “करतार सिंह सराभा” का ज़िक्र करके, राइटर ने उनकी थ्योरी और क्रांतिकारी सोच को हाईलाइट किया है। ये लाइनें दिखाती हैं कि वह नौजवान सिर्फ़ दिखावा करने वाला नहीं है, बल्कि वह है जो अपनी ज़मीर को ज़िंदा रखता है और इतिहास के हीरो से प्रेरणा लेता है।
गंभीर सुभाव अते साउपुना
“गेड़ी नारा ते ना मारी, गल करदे ना चीप…”
“चुन्नी साड़े उत्ते डोरे ना पावे बल्लीए…”
रिव्यू: आम तौर पर आजकल के गानों में लड़कियों के पीछे भागने की बात होती है, लेकिन इस गाने का बिल्कुल उल्टा और पॉज़िटिव साइड है। राइटर साफ़-साफ़ कहता है कि वे सस्ती बातें नहीं करते और आलस को बढ़ावा नहीं देते। वे अपने तरीके और तौर-तरीकों से जीना पसंद करते हैं।
शेरा वरगा जिगरा अते निडरता
दिखे अख साड़ी डीप, लाउंदे गेड़ी उते जीप…”
शेरा दी ए टोली विच कोई ना शीप…”
रिव्यू: “भेड़” और “शेर” की तुलना करके कहा जाता है कि उनके ग्रुप में कोई डरपोक या कमज़ोर दिल वाला इंसान नहीं होता। जीप पर सवार होना पंजाबी लड़कों का शौक बताता है, लेकिन उनकी आँखों की गहराई (डीप आईज़) उनकी गंभीरता और समझदारी दिखाती है।
सबर संतोख अते रब्बी रज़ा
“घाटा पैन ते ना रोला नैट उत्ते पाउंदे…”
रज़ा रब दी च रहिंदे ऊहदा सुकर मनाउंदे …”
रिव्यू: आजकल सोशल मीडिया (नेट) पर अपनी परेशानियाँ बताने का रिवाज़ है, लेकिन गाने के ये बोल बहुत मैच्योर सोच दिखाते हैं। ज़िंदगी में कोई नुकसान भी हो, तो वे हिम्मत नहीं हारते और सोशल मीडिया पर दिखावा नहीं करते, बल्कि भगवान की मर्ज़ी में रहकर शुक्रगुज़ार रहते हैं।
स्थाई सुर्खी रोहबदार तोर
“अनखी सुबहा दे आ गटसा च रहिने आ,
तोर कई गल्ला समझाए बालिए…”
रिव्यू: यह गाने की मेन हुक-लाइन है जो बार-बार आती है। “गढ़सा” का मतलब है पूरी इज्ज़त, शान और शान से जीना। राइटर के मुताबिक, उन्हें बोलकर अपनी तारीफ़ करने की ज़रूरत नहीं है, उनका शाही और सादा ‘तोर’ ही सब कुछ कह देता है।
गीतकारी दी तारीफ़
“गीत लिखदा तेजिंदर ए अनखी जोहे,
कोके अखरा दे जड़ के ए लाए बालिए…”
रिव्यू: आखिर में, राइटर तेजिंदर ने उनके लिखने के स्टाइल की तारीफ़ की है। “अक्षरों को एक साथ पिरोना” एक बहुत पॉपुलर पंजाबी मुहावरा है, जिसका मतलब है कि गाने का हर शब्द बहुत सोच-समझकर और कीमती तरीके से बुना गया है।
निष्कर्ष
यह गाना सिर्फ़ मनोरंजन का ज़रिया नहीं है, बल्कि पंजाबी कल्चर, शान, ऊंचे किरदार, सच्ची दोस्ती और धार्मिक-क्रांतिकारी विरासत का मेल है। लेखक तेजिंदर ने अश्लीलता और सस्ती शोहरत से दूर रहकर बहुत ही साफ़ और जोशीला गाना लिखा है, जो सुनने वाले की सोई हुई अंतरात्मा और आत्म-सम्मान को जगाने की क्षमता रखता है।
# रिपोर्ट: अलेक्जेंडर डिसूजा फरीदकोट।
फोटो: गीतकार तेजिंदर सिंह।




