चंडीगढ़ की जीत के बाद अब फिरोज़पुर के ‘फ्रांसिस न्यूटन अस्पताल’ को बचाने की मुहिम:
-₹54 लाख का बिजली बिल बना बड़ी बाधा—-
चंडीगढ़/फिरोज़पुर (एलेक्जेंडर डिसूज़ा): चंडीगढ़ में ईसाई कब्रिस्तानों के लाखों रुपये के पानी के बिल माफ करवाकर ऐतिहासिक सफलता हासिल करने वाली एकजुटता की लहर अब फिरोज़पुर पहुँच गई है। इस सफलता के ‘योद्धाओं’ से अब फिरोज़पुर के ऐतिहासिक फ्रांसिस न्यूटन अस्पताल को पुनर्जीवित करने के लिए मदद की गुहार लगाई गई है।
संकट में जीवनरेखा: ₹54 लाख का बकाया:
फिरोज़पुर का यह प्रतिष्ठित अस्पताल, जो कभी क्षेत्र के गरीबों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की जीवनरेखा हुआ करता था, आज अंधेरे में डूबने की कगार में है। अस्पताल पर ₹54 लाख का बिजली बिल बकाया है। वर्षों की प्रशासनिक अनदेखी और आर्थिक तंगी के कारण यह संस्थान बंद होने की कगार पर था, लेकिन अब अस्पताल की 60 साल पुरानी पूर्व छात्र संस्था (Alumni Association) ने अब इसे बचाने का बीड़ा उठाया है।
चंडीगढ़ के नेतृत्व से विशेष अपील:
अस्पताल के प्रशासकों और शुभचिंतकों ने चंडीगढ़ टीम के प्रमुख स्तंभों- रेवरेंड राजन शारदा, ग्लैडविन हार्डी, आइज़ैक नायर और सैमुअल शफ़ीक़ से इस संघर्ष में नेतृत्व करने का अनुरोध किया है।
“जिस तरह चंडीगढ़ में समुदाय की एकता ने असंभव को संभव कर दिखाया, वैसी ही इच्छाशक्ति की ज़रूरत यहाँ भी है। यदि सरकार इस भारी-भरकम बिजली बिल को एक बार के लिए माफ कर दे, तो प्रभु की कृपा से यह संस्थान दोबारा गरीबों की सेवा के लिए खड़ा हो सकता है।”
अस्पताल के शुभचिंतकों का संदेश:
एकजुटता से जगी नई उम्मीद
अस्पताल के पूर्व छात्रों और समुदाय का मानना है कि यदि चंडीगढ़ की अनुभवी टीम और स्थानीय पूर्व छात्र हाथ मिला लें, तो सरकार तक अपनी बात मजबूती से पहुँचाई जा सकती है। उद्देश्य केवल एक है: अस्पताल की ‘चमकती रोशनी’ को फिर से बहाल करना ताकि क्षेत्र के जरूरतमंद लोगों को एक बार फिर विश्व-स्तरीय और मुफ्त इलाज मिल सके।
न्यूज़: 25-2
फोटो कैप्शन 01: फिरोज़पुर का ऐतिहासिक फ्रांसिस न्यूटन अस्पताल।



