करोड़ों की रोशनी छह महीने में हुई बेनूर! मानपुर में स्ट्रीट लाइट परियोजना पर उठे सवाल, अंधेरे में डूब रहे मार्ग
GeM पोर्टल से खरीदी गई एलईडी स्ट्रीट लाइटें और सजावटी रोशनी हुई बंद, रखरखाव व्यवस्था पर सवाल; नगर परिषद ने सुधार का दिया भरोसा
यस न्यूज़ | उमरिया/मानपुर
फैज मोहम्मद की विशेष रिपोर्ट
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से सटे मानपुर नगर में करोड़ों रुपये की लागत से स्थापित की गई स्ट्रीट लाइट व्यवस्था महज छह महीने के भीतर ही दम तोड़ती नजर आ रही है। नगर परिषद मानपुर द्वारा GeM (गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस) पोर्टल के माध्यम से खरीदी और लगवाई गई एलईडी स्ट्रीट लाइटें अब जगह-जगह बंद पड़ी हैं, जबकि कई स्थानों पर लाइटों का बार-बार जलना और बुझना लोगों के लिए परेशानी का कारण बन गया है।
स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि नगर के कई प्रमुख मार्ग, मोहल्ले और सार्वजनिक स्थल रात होते ही अंधेरे में डूब जाते हैं। करोड़ों रुपये की इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्देश्य नगरवासियों को बेहतर प्रकाश व्यवस्था उपलब्ध कराना था, लेकिन वर्तमान हालात विकास के दावों पर ही सवाल खड़े कर रहे हैं।
सजावटी एलईडी भी बनी शोपीस
नगर को आकर्षक और आधुनिक स्वरूप देने के लिए बिजली के खंभों पर रंग-बिरंगी सजावटी एलईडी लाइटें भी लगाई गई थीं। इन लाइटों के जरिए मानपुर को एक अलग पहचान देने की कोशिश की गई थी, लेकिन अधिकांश स्थानों पर ये सजावटी लाइटें भी बंद पड़ी हैं।
जो रोशनी कभी नगर की सुंदरता बढ़ाने का माध्यम बनने वाली थी, वह अब सिर्फ खंभों पर टंगी सजावट बनकर रह गई है। इससे न केवल नगर की सौंदर्य व्यवस्था प्रभावित हुई है, बल्कि करोड़ों रुपये के सरकारी निवेश की उपयोगिता पर भी सवाल उठने लगे हैं।
छह महीने में खराब हुईं लाइटें, गुणवत्ता पर उठे प्रश्न
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नई स्थापित स्ट्रीट लाइटें मात्र छह महीने के भीतर ही खराब होने लगें, तो उनकी गुणवत्ता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। नगरवासियों के बीच चर्चा है कि क्या उपकरणों की गुणवत्ता की उचित जांच की गई थी? क्या खरीद प्रक्रिया के दौरान तकनीकी मानकों का पालन किया गया था? और क्या स्थापना के बाद समय-समय पर निगरानी की गई? इन सवालों का जवाब फिलहाल जिम्मेदार अधिकारियों के पास स्पष्ट रूप से नहीं दिखाई देता।
नियम क्या कहते हैं?
मध्यप्रदेश नगर पालिका अधिनियम, 1961 के अनुसार नगर परिषद का दायित्व है कि वह नगर क्षेत्र की सार्वजनिक प्रकाश व्यवस्था को सुचारु बनाए रखे तथा उसका नियमित रखरखाव सुनिश्चित करे।
इसके अलावा सामान्य वित्तीय नियम (GFR) और GeM पोर्टल के माध्यम से खरीदे गए उपकरणों पर निर्धारित वारंटी अवधि के दौरान यदि कोई सामग्री खराब होती है तो संबंधित आपूर्तिकर्ता या एजेंसी से उसकी मरम्मत अथवा प्रतिस्थापन कराना अनिवार्य होता है।
ऐसे में यह बड़ा प्रश्न खड़ा हो रहा है कि जब वारंटी अवधि के भीतर ही उपकरण खराब हो गए हैं, तो अब तक संबंधित एजेंसी के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई? क्या वारंटी क्लेम किया गया? और यदि किया गया तो सुधार कार्य में इतनी देरी क्यों हो रही है?
अंधेरे से बढ़ रहा दुर्घटनाओं और अपराध का खतरा
प्रकाश व्यवस्था प्रभावित होने का सीधा असर आम नागरिकों की सुरक्षा पर पड़ रहा है। रात के समय मुख्य मार्गों और सुनसान इलाकों में अंधेरा होने से सड़क दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ गई है। इसके साथ ही चोरी, असामाजिक गतिविधियों और अन्य आपराधिक घटनाओं के लिए भी अनुकूल परिस्थितियां बन रही हैं।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि नागरिकों को अंधेरे में आवागमन करना पड़े, तो विकास कार्यों की सफलता पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है।
जिम्मेदारों ने दिया सुधार का आश्वासन
इस संबंध में नगर परिषद मानपुर के लाइट प्रभारी एवं अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे हरगोविंद चतुर्वेदी ने बताया कि नगर में बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटों और सजावटी एलईडी लाइटों को चिन्हित किया जा रहा है। जल्द ही आवश्यक सुधार कार्य शुरू कराया जाएगा तथा वारंटी शर्तों के तहत संबंधित एजेंसी से मरम्मत एवं अन्य आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
हालांकि नगरवासियों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि यह आश्वासन धरातल पर कब तक दिखाई देता है और करोड़ों रुपये की इस प्रकाश परियोजना में फैला अंधेरा आखिर कब दूर होता है।
(यस न्यूज़ विशेष रिपोर्ट)





