विरासत और संविधान का संगम: बाबा फरीद पब्लिक स्कूल में खालसा स्थापना दिवस और अंबेडकर जयंती की धूम,

-पगड़ी प्रतियोगिता में दिखा पंजाब का गौरव; स्टूडेंट्स ने ‘नाम जपो, कीरत करो, वंड छको’ के साथ लिया शिक्षा का संकल्प—-
फरीदकोट (अलेक्जेंडर डिसूजा): स्थानीय बाबा फरीद पब्लिक स्कूल का प्रांगण आज इतिहास, भक्ति और संवैधानिक चेतना के एक अनोखे मिलन का गवाह बना। स्कूल में खालसा पंथ के 327वें स्थापना दिवस, भारत रत्न डॉ. बी. आर. अंबेडकर की 135वीं जयंती और वैशाखी के पावन पर्व को समर्पित एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
भक्तिमय शुरुआत और ऐतिहासिक गौरव:
कार्यक्रम का आगाज़ सुबह की प्रार्थना सभा के साथ हुआ। जब विद्यार्थियों ने वीर रस से भरा शब्द “देह शिवा बर मोहि इहै, शुभ करमन ते कबहूं न टरौं” गाया, तो पूरा परिसर खालसायी जज्बे से गूँज उठा। छात्रों ने गीतों और लोकगीतों के माध्यम से साल 1699 की उस ऐतिहासिक वैशाखी और दशमेश पिता गुरु गोविंद सिंह जी के महान बलिदान को याद किया।
पगड़ी प्रतियोगिता-मैदान में उतरा ‘छोटा पंजाब’:
इवेंट का मुख्य आकर्षण कक्षा 6वीं से 12वीं तक के छात्रों के बीच आयोजित पगड़ी बांधने की प्रतियोगिता रही। मैदान में जब कतारबद्ध होकर छात्रों ने पारंपरिक पगड़ी और साफे सजाए, तो ऐसा लगा मानो पूरा पंजाब स्कूल के आंगन में सिमट आया हो। स्कूल मैनेजमेंट कमेटी ने इस कला में अव्वल रहने वाले छात्रों को विशेष रूप से सम्मानित कर उनकी हौसला अफजाई की।
कलम की ताकत और नैतिक मूल्यों का संदेश:
स्कूल की एक्टिंग प्रिंसिपल सुखदीप कौर ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए डॉ. अंबेडकर और सिख गुरुओं के सिद्धांतों को जोड़ने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि डॉ. अंबेडकर का जीवन सिखाता है कि कलम ही सबसे बड़ा हथियार है। शिक्षित बनो, संघर्ष करो और समाज से ऊंच-नीच मिटाओ। साथ ही, खालसा पंथ के तीन स्तंभों-नाम जपो, कीरत करो और वंड छको-को अपने जीवन का आधार बनाएं।
संस्कृति ही भविष्य की नींव:
वाइस प्रिंसिपल हरसिमरनजीत कौर ने सफल आयोजन के लिए शिक्षकों और छात्रों की सराहना करते हुए कहा कि जिस देश की युवा पीढ़ी अपनी संस्कृति और विरासत पर गर्व करना सीख जाती है, उस राष्ट्र का भविष्य हमेशा सुरक्षित और उज्ज्वल रहता है।
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फोटो कैप्शन: बाबा फरीद पब्लिक स्कूल में पगड़ी प्रतियोगिता के दौरान अपनी विरासत का प्रदर्शन करते छात्र।



