नौरोजाबाद में रेत माफिया का बोलबाला: आखिर अवैध उत्खनन पर क्यों नहीं हो रही कार्रवाई?
जीवनदायिनी नदियों पर मंडरा रहा संकट, बेखौफ चल रहा अवैध रेत कारोबार
नौरोजाबाद क्षेत्र और उसके आसपास बहने वाली जीवनदायिनी नदियां इन दिनों अवैध रेत उत्खनन की मार झेल रही हैं। शासन और प्रशासन द्वारा लगातार सख्ती के निर्देश दिए जाने के बावजूद क्षेत्र में सक्रिय रेत माफिया खुलेआम नदी संसाधनों का दोहन कर रहे हैं। स्थिति यह है कि दिन-रात ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और डंपरों के जरिए रेत का अवैध उत्खनन और परिवहन जारी है, जबकि जिम्मेदार विभागों की कार्रवाई कहीं दिखाई नहीं दे रही।
स्थानीय ग्रामीणों और सूत्रों के अनुसार, इस पूरे अवैध कारोबार को रोकने में जिम्मेदार तंत्र पूरी तरह विफल साबित हो रहा है। लोगों का आरोप है कि संबंधित क्षेत्र में तैनात कुछ जिम्मेदार कर्मचारियों की कथित मिलीभगत के कारण रेत माफियाओं के हौसले बुलंद हैं और वे बिना किसी भय के अपने काम को अंजाम दे रहे हैं।
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शाम ढलते ही घाटों पर सक्रिय हो जाते हैं रेत कारोबारी
ग्रामीणों का कहना है कि जैसे ही सूरज ढलता है, नदी घाटों पर ट्रैक्टरों और मजदूरों की गतिविधियां तेज हो जाती हैं। रात के अंधेरे में बड़े पैमाने पर रेत निकाली जाती है और फिर उसे विभिन्न स्थानों पर ऊंचे दामों में बेच दिया जाता है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन रास्तों से रेत से भरे वाहन गुजरते हैं, उन मार्गों पर संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था होने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हो रही। स्थानीय लोगों का आरोप है कि शिकायतों के बाद भी केवल औपचारिकताएं पूरी की जाती हैं, जबकि अवैध कारोबार बदस्तूर जारी रहता है।
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बीट गार्ड की भूमिका पर उठ रहे गंभीर सवाल
क्षेत्र में लगातार चल रहे अवैध उत्खनन को लेकर ग्रामीणों ने संबंधित बीट गार्ड और वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। लोगों का कहना है कि यदि विभाग पूरी तरह सतर्क और सक्रिय हो तो अवैध रेत परिवहन को आसानी से रोका जा सकता है।
ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार शिकायतें किए जाने के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसी कारण क्षेत्र में यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि कहीं न कहीं संरक्षण और मिलीभगत के चलते ही यह कारोबार निर्बाध रूप से संचालित हो रहा है।
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सरकारी राजस्व को लाखों का नुकसान, पर्यावरण पर गहरा असर
अवैध रेत उत्खनन केवल कानून व्यवस्था का मामला नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण और सरकारी खजाने दोनों के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। बिना रॉयल्टी और वैध अनुमति के निकाली जा रही रेत से सरकार को हर महीने लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है।
वहीं दूसरी ओर नदियों का प्राकृतिक संतुलन भी बिगड़ रहा है। जलस्तर में गिरावट, जलीय जीवों के अस्तित्व पर खतरा और नदी तटों के क्षरण जैसी समस्याएं तेजी से सामने आ रही हैं। भारी वाहनों की लगातार आवाजाही से ग्रामीण सड़कों की हालत भी बदतर होती जा रही है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है।
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ग्रामीणों में आक्रोश, निष्पक्ष जांच की मांग
नौरोजाबाद क्षेत्र के जागरूक नागरिकों और ग्रामीणों में इस मुद्दे को लेकर भारी नाराजगी देखी जा रही है। लोगों ने जिला प्रशासन, खनिज विभाग और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि किसी भी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही अवैध रेत उत्खनन में संलिप्त लोगों पर भी सख्त दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि क्षेत्र की प्राकृतिक संपदा को बचाया जा सके।
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बड़ा सवाल: आखिर नौरोजाबाद में अवैध उत्खनन पर कार्रवाई क्यों नहीं?
जब क्षेत्र में लगातार ट्रैक्टर-ट्रॉलियां रेत से भरकर सड़कों पर दौड़ रही हैं, ग्रामीण लगातार शिकायतें कर रहे हैं और नदियों का सीना छलनी हो रहा है, तब सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि आखिर नौरोजाबाद में अवैध रेत उत्खनन और परिवहन पर प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं दिखाई दे रही?
क्या जिम्मेदार विभागों की नजर इस अवैध कारोबार पर नहीं पड़ रही, या फिर इसके पीछे कोई ऐसा तंत्र काम कर रहा है जो कार्रवाई की राह में बाधा बन रहा है? इन सवालों का जवाब अब प्रशासन और संबंधित विभागों को देना होगा। क्षेत्रवासियों को उम्मीद है कि उच्च अधिकारी मामले को गंभीरता से लेते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेंगे और नदियों को अवैध दोहन से बचाने के लिए ठोस कदम उठाएंगे।





