मोंहदी पंचायत में 7 लाख के निर्माण कार्य पर सवाल, शिकायतकर्ता को धमकाने के आरोप; उच्चस्तरीय जांच की मांग तेज
राजेन्द्रग्राम/अनूपपुर। जनपद पंचायत पुष्पराजगढ़ की ग्राम पंचायत मोंहदी एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में है। ग्रामीणों और शिकायतकर्ता का कहना है कि यहां मनरेगा और पंचम वित्त आयोग के कार्यों में बड़े स्तर पर अनियमितता और मिलीभगत के संकेत मिल रहे हैं, जिसमें इंजीनियर, सरपंच, सचिव और ठेकेदार की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
6 दिनों में 7 लाख का रपटा पुलिया, मजदूरों की जगह मशीनों का इस्तेमाल
ग्राम पंचायत मोंहदी के कीरा नाला क्षेत्र में करीब 7 लाख रुपये की लागत से रपटा पुलिया निर्माण कार्य मात्र 6 दिनों में पूरा कर दिया गया। आरोप है कि इस कार्य में मजदूरों की बजाय भारी मशीनों का उपयोग किया गया, जिससे मनरेगा के मूल उद्देश्य—रोजगार सृजन—पर सवाल खड़े हो गए हैं।ग्रामीणों का कहना है कि मौके पर न तो पर्याप्त मजदूर दिखे और न ही काम का पारदर्शी रिकॉर्ड सामने आया। इसके बावजूद सीसी (कंक्रीट) कार्य भी मशीनों से ही पूरा किए जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
शिकायत के बाद उल्टा शिकायतकर्ता पर दबाव का आरोप
मामले में सबसे गंभीर आरोप यह है कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन (CM हेल्पलाइन) पर शिकायत दर्ज कराने के बाद भी अब तक कोई जांच या कार्रवाई नहीं हुई।इसके उलट, शिकायतकर्ता का आरोप है कि सरपंच और सचिव ने अपने बचाव में थाना अमरकंटक में एक आवेदन देकर शिकायतकर्ता पर 10 हजार रुपये मांगने जैसे आरोप लगाए हैं ।शिकायतकर्ता का कहना है कि यह कदम वास्तविक मुद्दे से ध्यान भटकाने और दबाव बनाने की कोशिश है, ताकि शिकायत वापस ली जा सके।
ग्रामीणों का सवाल—“रोजगार किसके लिए?”
स्थानीय ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से तीखे सवाल उठाए हैं कि जब सरकार का उद्देश्य गरीबों और आदिवासी मजदूरों को रोजगार देना है, तो फिर मशीनों से काम कर रोजगार के अवसर क्यों छीने जा रहे हैं? लोगों का कहना है कि ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारी डीजल और मशीनों के खर्च के नाम पर सरकारी धन का दुरुपयोग कर रहे हैं, जबकि मजदूरों को काम नहीं मिल रहा।
खेत तालाब से लेकर शौचालय तक जांच की मांग
ग्रामीणों ने केवल रपटा पुलिया ही नहीं, बल्कि पंचायत में हुए अन्य सभी कार्यों की भी विस्तृत जांच की मांग की है, जिनमें शामिल हैं—
खेत तालाब निर्माण की जमीन, खसरा नंबर और हितग्राही सत्यापन
कचरा घर, शौचालय, सोकता गड्ढा और सेग्रीगेशन शेड की गुणवत्ता जांच
पेंशन वितरण में अपात्र लाभार्थियों की जांच
घर-घर शौचालय योजना की वास्तविक स्थिति की पड़ताल
साथ ही यह भी आरोप लगाया गया है कि पंचायत सचिव पहले अन्य स्थान पर अनियमितताओं के कारण निलंबित हो चुके हैं, बावजूद इसके वर्तमान में भी कार्यप्रणाली पर सवाल बने हुए हैं।
दोषियों पर कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों और शिकायतकर्ता ने मांग की है कि मामले की जांच केवल जनपद स्तर पर न होकर जिला स्तरीय उच्चस्तरीय टीम से कराई जाए। साथ ही यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित सरपंच, सचिव, रोजगार सहायक, इंजीनियर और ठेकेदार के खिलाफ FIR दर्ज की जाए।
एक साल से लंबित मामला
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में अनियमितताओं के आरोप पहले भी सामने आ चुके हैं, लेकिन जांच के नाम पर मामले को दबा दिया गया। अब CM हेल्पलाइन में शिकायत के बावजूद कार्रवाई न होना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या ग्रामीणों को न्याय तथा पारदर्शिता का भरोसा मिल पाता है या नहीं।





