बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व क्षेत्र में बाघ का आतंक: डेढ़ महीने में दो की मौत, ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी
उमरिया (मध्य प्रदेश):
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के बफर और कोर जोन से सटे मानपुर जनपद के ग्राम कुदरी और आसपास के क्षेत्रों में इन दिनों बाघ (टाइगर) का जबरदस्त आतंक बना हुआ है। पिछले डेढ़ महीने के भीतर बाघ के लगातार हमलों से पूरे क्षेत्र में भय और असुरक्षा का माहौल है, जिसके कारण ग्रामीणों का अपने खेतों, जंगलों और दैनिक कार्यों के लिए घर से बाहर निकलना भी दूभर हो गया है। हालात की गंभीरता को देखते हुए मानपुर क्षेत्र की जनपद सदस्य रोशनी सिंह, जनपद सदस्य हीरालाल यादव और महिला कांग्रेस अध्यक्ष अंजू सिंह के नेतृत्व में सैकड़ों ग्रामीणों ने बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक को एक ज्ञापन सौंपकर तत्काल सुरक्षा की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग की शिथिल कार्यप्रणाली के कारण क्षेत्र में लगातार इंसानों और मवेशियों पर जानलेवा हमले हो रहे हैं, जिससे आमजन में प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश व्याप्त है।
ज्ञापन में हाल ही में हुई दर्दनाक घटनाओं का ब्यौरा देते हुए बताया गया कि बीती 10 अप्रैल 2026 को ग्राम झलवार निवासी कुसुम बाई गौड़ की अपने निजी खेत में महुआ बीनने के दौरान बाघ के हमले में मौत हो गई थी। इसके बाद 4 मई को ग्राम कुदरी के रज्जू कोल बाघ के हमले में गंभीर रूप से घायल हुए, और फिर 17 मई को कुदरी की ही ममता यादव को बाघ ने अपना शिकार बना लिया, जिससे उनकी भी जान चली गई। यही नहीं, हाल ही में फॉरेस्ट बैरियर के पास ही दशमत जायसवाल के बैल को भी बाघ ने अपना निवाला बना लिया। इन लगातार हो रही घटनाओं से बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता बनी हुई है और किसी बड़ी जनहानि की आशंका लगातार सिर उठा रही है।
इस भयावह स्थिति से निपटने के लिए ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने 7 सूत्रीय मांगें रखी हैं। उन्होंने मांग की है कि ग्राम कुदरी और आसपास के क्षेत्रों में बाघ की सतत निगरानी के लिए विशेष टीमें तैनात की जाएं, प्रभावित इलाकों में तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर सुरक्षा बढ़ाई जाए, और ग्रामीणों को सतर्क करने के लिए गांवों में मुनादी कराकर जागरूकता अभियान चलाया जाए। इसके साथ ही मृतकों के पीड़ित परिजनों को शासन के नियमानुसार तुरंत मुआवजा राशि देने, वन विभाग द्वारा नियमित गश्त बढ़ाने, कोर व बफर क्षेत्र के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा श्रमिकों और वन आरक्षकों की संख्या में बढ़ोतरी करने तथा प्रभावित क्षेत्रों में अस्थायी सुरक्षा चौकी स्थापित करने की मांग पुरजोर तरीके से उठाई गई है। ग्रामीणों ने प्रशासन को साफ चेतावनी दी है कि यदि इन मांगों पर तत्काल प्रभाव से ठोस और प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, तो वे लोकतांत्रिक माध्यमों से उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और वन विभाग की होगी।




