करोड़ों खर्च, फिर भी प्यासा है खांड; MPUDC की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

व्यवहारी( बाणसागर): मध्य प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी योजना “हर घर नल से जल” का उद्देश्य हर परिवार तक शुद्ध पेयजल पहुँचाना था। लेकिन नगर परिषद खांड में मध्य प्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड (MPUDC) के अंतर्गत चल रही पेयजल योजना भ्रष्टाचार और लापरवाही की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। कागजों पर करोड़ों खर्च होने के बावजूद जमीनी हकीकत यह है कि नल तो लग गए हैं, लेकिन उनमें जल का नामोनिशान नहीं है।वार्ड क्रमांक 13, 14 वाटर सप्लाई कनेक्शन किए गए उनमें से कुछ घरों में सप्लाई का पानी धीमी गति से आता है शिकायत के बावजूद भी सुधार नहीं हो पाया ! एमपी यूडीसी मैं शिकायत रजिस्टर तक उपलब्ध नहीं है वाटर प्लांट इंचार्ज सुबोध अग्रहरि और इंजीनियर संजय शुक्ला द्वारा सादे कागज पर शिकायतकर्ता के सिर्फ नाम लिखकर समस्या का निराकरण करने का झूठा आश्वासन दिया जाता हैं I
: : दिखावा बने नल कनेक्शन: वार्ड क्रमांक 5 और 7 में घरों के बाहर नल के स्टैंड तो लगा
दिए गए हैं, लेकिन मुख्य सप्लाई लाइन से न जुड़ने या प्रोजेक्ट अधूरा होने के कारण लोगों को अब भी दूर-दराज के हैंडपंपों और कुओं का सहारा लेना पड़ रहा है।
: : जनता का बढ़ता आक्रोश :

भीषण गर्मी की शुरुआत के साथ ही खांड के रहवासियों में नगर परिषद और विभाग के प्रति रोष व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार की योजनाएं केवल विज्ञापनों तक सीमित हैं। “जब नल में पानी ही नहीं आना था, तो घर-घर कनेक्शन का ड्रामा क्यों किया गया?” यह सवाल आज खांड का हर नागरिक पूछ रहा है।
: : क्या कहता है प्रशासन?:
अधिकारी अक्सर “तकनीकी खराबी” या “पाइपलाइन टेस्टिंग” का बहाना बनाकर पल्ला झाड़ लेते हैं। हालांकि, मुख्यमंत्री कार्यालय के हालिया निर्देशों के अनुसार, नल जल योजना में लापरवाही बरतने वाले ठेकेदारों और अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई और निलंबन के आदेश दिए गए हैं।
: : आंदोलन की चेतावनी : रहवासियों का कहना है कि यदि 15 दिनों के भीतर नियमित जलापूर्ति शुरू नहीं किया गया, तो वे नगर परिषद कार्यालय का घेराव करेंगे। यदि जल्द ही MPUDC और स्थानीय प्रशासन ने सुध नहीं ली, तो आगामी दिनों में नगर परिषद खांड के लोगों को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है।




