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फरीदकोट: मेडिकल कॉलेज में वेंटिलेटर की कमी से पूर्व पुलिस कर्मी की मौत, -वीसी ने दिए 48 घंटे में उच्च स्तरीय जांच के आदेश—-

Alexander D’Souza
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फरीदकोट: मेडिकल कॉलेज में वेंटिलेटर की कमी से पूर्व पुलिस कर्मी की मौत,
-वीसी ने दिए 48 घंटे में उच्च स्तरीय जांच के आदेश—-
फरीदकोट (अलेक्जेंडर डिसूजा): स्थानीय गुरु गोबिंद सिंह मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है, जहाँ लिवर की गंभीर बीमारी से जूझ रहे एक मरीज ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इस घटना ने जहाँ एक ओर परिवार को गहरा सदमा दिया है, वहीं अस्पताल प्रशासन ने भी मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत सुधारात्मक कदम उठाए हैं।
क्या है पूरा मामला?
मृतक के रिश्तेदार कश्मीर सिंह ने बताया कि उनके परिजन, जो 6 महीने पहले ही पुलिस विभाग से सेवानिवृत्त हुए थे, लिवर की क्रोनिक बीमारी के कारण अस्पताल में उपचाराधीन थे। कल तबीयत बिगड़ने पर उन्हें इमरजेंसी में लाया गया। परिजनों का आरोप है कि उन्हें समय पर वेंटिलेटर नहीं मिला और एहतियात के तौर पर डॉक्टरों ने उन्हें ‘एंबू-बैग’ (हाथ से सांस देने वाला उपकरण) थमा दिया। परिजनों का कहना है कि यदि आधुनिक मशीनरी उपलब्ध होती, तो शायद जान बचाई जा सकती थी।
अस्पताल प्रशासन का पक्ष और तत्परता:
घटना की सूचना मिलते ही बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज के वाइस चांसलर डॉ. राजीव सूद ने गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि डॉक्टरों ने मरीज की जान बचाने के लिए हर संभव तकनीकी प्रयास किए।
मशीनी खराबी: डॉक्टर सूद के अनुसार, मरीज जिस बेड पर थे, उसका वेंटिलेटर अचानक तकनीकी खराबी का शिकार हो गया। ऐसी आपात स्थिति में मरीज को ऑक्सीजन की कमी से बचाने के लिए डॉक्टरों ने तुरंत ‘एंबू-बैग’ का सहारा लिया।
सुविधाओं में विस्तार: वीसी ने बताया कि इमरजेंसी में पहले केवल 2 वेंटिलेटर थे, जिन्हें बढ़ाकर 5 किया गया था। इस घटना के बाद तुरंत 2 अतिरिक्त वेंटिलेटर स्टैंडबाय पर रख दिए गए हैं ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति न बने।
जांच कमेटी का गठन:
वीसी ने कहा कि मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. नीतू कुक्कड़ के साथ विचार-विमर्श के बाद एक विशेष जांच टीम गठित कर दी गई है। यह टीम 48 घंटे के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि मशीनरी में खराबी क्यों आई और ड्यूटी पर मौजूद स्टाफ की क्या भूमिका थी।
“हम परिवार के दुख में शामिल हैं। संस्थान का लक्ष्य हर जान को बचाना है। यदि इस मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही पाई गई, तो उचित कार्रवाई की जाएगी”—डॉ. राजीव सूद, वाइस चांसलर।
न्यूज़: 28-4,
फोटो कैप्शन: गुरु गोबिंद सिंह मेडिकल कॉलेज के एमरजेंसी का मुख्य द्वार।

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