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आदिवासियों की जमीन पर कंपनियों की नजर? दुधमनिया में कांग्रेस का बड़ा धरना, भूमि अधिग्रहण रोकने की मांग

admin
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“आदिवासियों की जमीन पर कंपनियों की नजर?” दुधमनिया में कांग्रेस का बड़ा धरना, भूमि अधिग्रहण रोकने की मांग

 

गोल्ड व बेस मेटल परियोजना के नाम पर जमीन लेने का आरोप | मुआवजा, वनाधिकार और बिजली की समस्या पर उठी आवाज | मांगें पूरी न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी

 

सिंगरौली, 17 मार्च 2026 (सूरज सिंह)।

चितरंगी क्षेत्र के आदिवासी बहुल गांवों में भूमि अधिग्रहण और मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी (ग्रामीण) ने दुधमनिया गांव में बड़ा धरना प्रदर्शन किया। धरने में कांग्रेस पदाधिकारियों के साथ बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण भी शामिल हुए। इस दौरान कांग्रेस नेताओं ने राज्यपाल के नाम एक ज्ञापन सौंपकर आदिवासी और गरीब किसानों की जमीन विभिन्न औद्योगिक परियोजनाओं के नाम पर अधिग्रहित किए जाने का आरोप लगाया।

 

यह ज्ञापन तहसीलदार दुधमनिया सारिका परस्ते को सौंपा गया, जिसे उपखंड अधिकारी (एसडीएम) चितरंगी के माध्यम से राज्यपाल तक भेजा जाएगा। ज्ञापन में भूमि अधिग्रहण, मुआवजा, वनाधिकार, बिजली जैसी मूलभूत समस्याओं को प्रमुखता से उठाया गया है।

 

 

 

औद्योगिक परियोजनाओं के नाम पर जमीन अधिग्रहण का आरोप

 

धरना प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि दुधमनिया और चितरंगी तहसील के कई आदिवासी गांवों की जमीन लगातार अलग-अलग औद्योगिक परियोजनाओं के नाम पर अधिग्रहित की जा रही है। इससे आदिवासी और दलित परिवारों के सामने आजीविका और विस्थापन का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

 

ज्ञापन में कहा गया कि मिसिरगवां आयरन ब्लॉक इंटीग्रेटेड स्टील प्लांट के नाम पर पहले से ही कई गांवों में भूमि विवाद चल रहा है। इसके बावजूद अब सुलखानखुर्द, मटिहनी, जमतीहवा, बुढाडोल, बड़गड़, बोदरहवा, बगैया, गौरहवा, बोहास और परसिधाई जैसे कई गांवों की जमीन गोल्ड एवं बेस मेटल परियोजना के नाम पर अधिग्रहित करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। कांग्रेस ने इस पूरी प्रक्रिया को तत्काल रोकने की मांग की है।

 

 

 

रिलायंस परियोजना का भी उठाया मुद्दा

 

कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि करीब 20 वर्ष पहले बगैया और खोखवा गांव की जमीन रिलायंस परियोजना के नाम पर अधिग्रहित की गई थी, लेकिन आज तक वहां कोई उद्योग स्थापित नहीं हुआ। इसके चलते किसानों की जमीन वर्षों से खाली पड़ी है और उन्हें न रोजगार मिला और न ही जमीन वापस की गई। कांग्रेस ने सरकार से किसानों की जमीन वापस दिलाने की मांग की है।

 

 

 

मुआवजा और वनाधिकार के मुद्दे भी उठाए

 

धरने के दौरान प्रयागराज–चितरंगी–सिंगरौली राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-135सी) के लिए अधिग्रहित जमीन, मकान और कुओं का मुआवजा अब तक न मिलने का मुद्दा भी उठाया गया। कांग्रेस ने मांग की कि प्रभावित किसानों को जल्द से जल्द उनका उचित मुआवजा दिया जाए।

 

इसके साथ ही लंबे समय से लंबित वनाधिकार दावों का निराकरण कर अनुसूचित जनजाति के किसानों को वनाधिकार पट्टे देने की मांग भी की गई। ज्ञापन में पिपरहवा राजस्व ग्राम का अलग खसरा नक्शा उपलब्ध कराने और कई गांवों में विद्युतीकरण का सर्वे कर बिजली सुविधा उपलब्ध कराने की मांग भी रखी गई।

 

 

 

आदिवासियों के अस्तित्व पर खतरा: सरस्वती सिंह

 

धरना कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कांग्रेस ग्रामीण अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक सरस्वती सिंह ने कहा कि प्रदेश की भाजपा सरकार आदिवासी क्षेत्रों की जमीन कंपनियों को देने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज सदियों से जल, जंगल और जमीन पर निर्भर रहा है और यही उनकी आजीविका का आधार है। यदि उनकी जमीन अधिग्रहित की गई तो उनके सामने जीवनयापन का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।

 

 

 

पहले भी किसानों को नहीं मिला लाभ: अशोक सिंह पैगाम

 

जिला पंचायत सदस्य अशोक सिंह पैगाम ने कहा कि क्षेत्र में पहले भी उद्योगों के नाम पर किसानों की जमीन ली गई, लेकिन कई स्थानों पर उद्योग शुरू ही नहीं हुए। ऐसे में किसानों को न रोजगार मिला और न ही जमीन वापस की गई, जिससे ग्रामीणों को भारी नुकसान उठाना पड़ा।

 

 

 

मांगें पूरी नहीं हुईं तो होगा बड़ा आंदोलन

 

पूर्व ग्रामीण अध्यक्ष ज्ञानेंद्र द्विवेदी ने कहा कि विकास के नाम पर आदिवासी क्षेत्रों की जमीन निजी कंपनियों को सौंपने की कोशिश की जा रही है, जो आदिवासी समाज के अधिकारों और अस्तित्व के लिए खतरा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया नहीं रोकी गई तो कांग्रेस पार्टी आदिवासियों और किसानों के साथ मिलकर व्यापक आंदोलन शुरू करेगी।

 

 

 

स्थानीय युवाओं को रोजगार और बेहतर मुआवजे की मांग

 

धरना प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं और ग्रामीणों ने मांग की कि जिन किसानों की जमीन अधिग्रहित की जा रही है, उन्हें बाजार दर से कई गुना अधिक मुआवजा, समुचित पुनर्वास और परियोजनाओं में स्थानीय युवाओं को स्थायी रोजगार दिया जाए।

 

 

 

ये रहे प्रमुख रूप से मौजूद

 

इस धरना प्रदर्शन में पूर्व विधायक एवं कांग्रेस ग्रामीण अध्यक्ष सरस्वती सिंह, जिला पंचायत सदस्य अशोक सिंह पैगाम, पूर्व ग्रामीण अध्यक्ष ज्ञानेंद्र द्विवेदी, वरिष्ठ नेता लल्ला राम पांडेय, नरेंद्र चंद्र सिंह, अरविंद सिंह, सोमदेव ब्रह्म जू देव, राजेश प्रताप सिंह, बुद्धिमान सिंह, संकठा सिंह, सुनील देव सिंह, राजेश पनिका, प्रेमदत्त वैश्य, अरुण धर, भूपेन्द्र द्विवेदी, रमाशंकर सिंह, विजय प्रताप सिंह, जगत सिंह, लालता सिंह, कमला वैश्य, भाष्कर मिश्रा, विपिन तिवारी, उपेंद्र दुबे, मनोज दुबे, पंकज सिंह, प्रशांत सिंह बादल, हैप्पी सिंह, गजाधर वैश्य सहित सैकड़ों कांग्रेस पदाधिकारी, कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण मौजूद रहे।

 

 

 

 

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