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पूरे मध्यप्रदेश में चरमराई स्वास्थ्य सेवाएं ! 8 हजार जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर, स्टाइपेंड वृद्धि की मांग पर अड़े

admin
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MP Junior Doctors Strike:

मध्यप्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सोमवार से स्वास्थ्य व्यवस्थाएं चरमरा गई हैं. प्रदेश के लगभग 8 हजार जूनियर डॉक्टर अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं. दरअसल स्टाइपेंड संशोधन (Stipend Revision) लागू न होने से नाराज रेजिडेंट डॉक्टर, सीनियर रेजिडेंट और इंटर्न ने नियमित सेवाओं का पूरी तरह बहिष्कार कर दिया है. भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज से लेकर इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, रीवा, सागर और खंडवा तक इस आंदोलन का असर देखा जा रहा है. हालांकि, डॉक्टरों ने मानवीय आधार पर आपातकालीन सेवाओं (Emergency Services) को हड़ताल से बाहर रखा है, लेकिन ओपीडी और रूटीन ऑपरेशंस रुकने से दूर-दराज से आए मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.

 

क्यों हो रही है यह हड़ताल?

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जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JDA) के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्र प्रताप के अनुसार, यह विवाद साल 2021 में हुए समझौते से जुड़ा है. उस समय हड़ताल के बाद सरकार ने स्टाइपेंड को 55 हजार से बढ़ाकर 65 हजार रुपये किया था. साथ ही यह लिखित आश्वासन दिया था कि हर साल 1 अप्रैल को उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आधार पर स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की जाएगी. डॉक्टरों का आरोप है कि 1 अप्रैल 2025 से होने वाला यह संशोधन अब तक लागू नहीं हुआ है. पिछले एक साल से मंत्री और प्रशासन को कई बार पत्र लिखने के बावजूद जब कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ, तो डॉक्टरों को विरोध का रास्ता चुनना पड़ा. पहले तीन दिनों तक काली पट्टी बांधकर काम करने के बाद भी सुनवाई न होने पर अब काम बंद कर दिया गया है.

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