कोतवाली पुलिस की त्वरित कार्रवाई, मुख्य आरोपी शिब्बू और मुकेश पटेल भेजे गए जेल
एसपी के निर्देश पर जिला बदर की कार्रवाई शुरू, फरार आरोपियों की तलाश जारी
अनूपपुर।

अनूपपुर में वरिष्ठ पत्रकार अमित शुक्ला पर हुए जानलेवा हमले ने न केवल पत्रकारिता जगत बल्कि आमजन में भी चिंता उत्पन्न की है। यह घटना इस बात की गंभीर याद दिलाती है कि समाज के चौथे स्तंभ की सुरक्षा सुनिश्चित करना कितना आवश्यक है। जिसके बाद राष्ट्रीय श्रमजीवी पत्रकार परिषद के जिलाध्यक्ष एवं अधिमान्य पत्रकार अमित शुक्ला पर अपराधिक तत्वों द्वारा जानलेवा हमला किये जाने पर बड़ी सख्यां में पत्रकारों द्वारा 18 मार्च को कोतवाली निरीक्षक अरविंद जैन से मुलाकात कर आरोपियों के खिलाफ सख्त एवं त्वरित कार्रवाई की मांग की गई थी। मामले की गंभीरता को समझते हुए कोतवाली निरीक्षक अरविंद जैन ने तत्परता और जिम्मेदारी का परिचय दिया। उन्होने तत्काल पुलिस अधीक्षक मोती उर्र रहमान को घटना की जानकारी से अवगत कराते हुए उनके निर्देशन पर कार्रवाई शुरू की। पुलिस ने तेजी दिखाते हुए आरोपी शिब्बू पटेल, मुकेश पटेल, गंगाराम पटेल एवं अनीश पटेल सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ धारा 119(1), 296 बी, 115(2), 351(2), 3(5) बीएनएस के तहत मामला दर्ज करते हुये शिब्बू पटेल एवं मुकेश पटेल को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हे जेल भेज दिया गया।
कोतवाली निरीक्षक अरविंद जैन ने बताया कि 17 मार्च की रात पत्रकार अमित कुमार शुक्ला निवासी चेतना नगर, अनूपपुर के साथ भी आरोपियों ने मारपीट और अवैध उगाही का प्रयास किया। इस संबंध में अपराध क्रमांक 175/26 दर्ज किया गया। पत्रकार अमित कुमार शुक्ला निवासी चेतना नगर अनूपपुर के साथ सभी आरोपियों ने अवैध उगाही के उद्देश्य से धमकी देते हुए मारपीट की गई थी। इसके पूर्व उसी दिन रात लगभग 8 बजे फरियादी अभिजीत सिंह पिता चारधाम सिंह उम्र 34 वर्ष के साथ उक्त आरोपियों द्वारा अमरकंटक तिराहे पर अवैध वसूली के लिये भी मारपीट की गई। जिस पर अलग से भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया गया है। कोतवाली निरीक्षक अरविंद जैन ने बताया कि घटना को अंजाम देने वाले सभी आरोपियों के खिलाफ पहले भी मारपीट, गाली-गलौज, धमकी और मारपीट किये जाने के कई मामले दर्ज है। जिसके बाद पुलिस अधीक्षक ने इनके आपराधिक रिकॉर्ड को देखते हुए जिला बदर की कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
कोतवाली निरीक्षक अरविंद जैन की त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सराहनीय है। उन्होंने न केवल मामले को गंभीरता से लिया बल्कि यह भी सुनिश्चित किया कि आरोपियों के खिलाफ कानून के तहत सख्त कदम उठाए जाएं। उनकी सक्रियता से आमजन में यह संदेश गया है कि कानून सबके लिए समान है और अपराधियों को बख्शा नहीं जाएगा। यह घटना जहां एक ओर पत्रकारों की सुरक्षा पर सवाल खड़े करती है, वहीं पुलिस की तत्परता और निष्पक्ष कार्रवाई भरोसा भी जगाती है। आवश्यकता है कि ऐसे मामलों में और भी सख्ती बरती जाए ताकि पत्रकार निडर होकर अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर सकें और समाज में कानून का राज कायम रहे।


