बांस कलाकारों पर कोरोना का साया,दो वर्ष से लाचार धन्नू बन्सकार

बांस कलाकारों पर कोरोना का साया,दो वर्ष से लाचार धन्नू बन्सकार

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धन्नू बन्सकार दो वर्ष से लाचार।

 

केशवाही, शहडोल।

 

आज दिनांक – 03/05/2021 को धन्नू बन्सकार ग्राम जमुनिहा पोस्ट केशवाही थाना बुढार जिला शहडोल (म प्र) के निवासी हैं । इनसे चर्चा के दौरान धन्नू बन्सकार ने बतलाया कि हम लोग बाँस के बर्तन बनाने का कार्य पुश्तैनी करते आ रहे है ।

इस कार्य को करने में घर के सभी सदस्यों का सहयोग रहता है। मेरी पत्नी नान बाई का विशेष सहयोग रहता है। हम बाँस के बर्तन में –छन्नी , टोपरी, तोपरा , झाल , सुकसुइया , बेनमा (पंखा) , सूपा, छिटवा, झांपी आदि बनाते हैं।

मेरे तीन लड़का,तीन लड़की , मेरी माता जी और हम दोनो इस तरह नौ लोग होते हैं । हमारे पास खेती के कार्य के लिये जमीन नहीं है । हमारे जीवकोपार्जन का एक मात्र सहारा बाँस के बर्तन बनाकर ही करते हैं ।

धन्नू ने आगे बतलाया की पिछले वर्ष भी लॉक डाउन लग गया था तो धन्धा नहीं कर पाये थे और इस वर्ष भी लॉक डाउन लग गया तो शादिया रुक गई तो हमारे बाँस के बर्तन की बिक्री भी नाम मात्र के रह गया है।ऐसी हालत में हमारे जीवन निवार्ह करने में काफी दिक्कत हो रही है। उधार लेकर काम चला रहे हैं।

 

पूछें जाने पर धान्नू ने बतलाया की सीजन में लगभग तीस हजार रुपये कमा लेते हैं तो एक वर्ष का खर्च चल जाता है लड़को को कपडे , किराना सामग्री , बिमारी आदि पर खर्च हो जाते हैं । पर इन दो वर्षो में कर्जदार हो गये हैं । इस कोरोना की महामारी ने हमारा पूरा बजट ही बिगाड़ दिया है ।क्या करें क्या ना करें समझ में नहीं आता है ।

 

पूंछे जाने पर धन्नू ने बतलाया कीगरीबी रेखा का कार्ड तो बना है पर इतना बडा परिवार के लिये जो सामग्री मिलता है तो कहां पुज पाता है ।पुरातन सभ्यता को आज भी बन्सकार जाति के लोग पैतृक कार्य को समझ कर करते आ रहे हैं , जो आम लोंगो की आवस्यकताओ की वस्तुओ को अपने हाथों से बना कर हम तक पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं । इनकी कई समस्याएँ भी है जिनका निदान सरकार को करनी चाहिये । टोकनी बनाने का कार्य आधुनिक औजारों का उपलध्ता, कर्ज वितरण कर बन्सकारो को प्रोत्साहन करने की जरुरत है।जिससे हामारी पुरानी संस्कृति बरकरार रहे।

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