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देश का फेडरल स्ट्रक्चर बचाने के लिए लोगों का एकजुट होना ज़रूरी: कॉमरेड बंत बराड़ -मोदी सरकार कॉर्पोरेट परस्त नीतियां छोड़कर पंजाब के बुनियादी मसलों को तुरंत हल करे: हरदेव अर्शी

Alexander D’Souza
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देश का फेडरल स्ट्रक्चर बचाने के लिए लोगों का एकजुट होना ज़रूरी: कॉमरेड बंत बराड़
-मोदी सरकार कॉर्पोरेट परस्त नीतियां छोड़कर पंजाब के बुनियादी मसलों को तुरंत हल करे: हरदेव अर्शी 


-फरीदकोट में CPI की सफल जिला स्तरीय कन्वेंशन के बाद केंद्र व राज्य सरकार के खिलाफ जोरदार विरोध मार्च…
फरीदकोट, 31 मई (अलेक्जेंडर डिसूजा): “जिस तरह से केंद्र की मोदी सरकार देश के संविधान के साथ खिलवाड़ कर रही है और ईडी (ED), सीबीआई (CBI), दूसरी जांच एजेंसियों व इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया का गलत इस्तेमाल करके तानाशाही राज कायम कर रही है, वह सभी देशवासियों के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती है।”
यह शब्द भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के नेशनल काउंसिल मेंबर और पूर्व स्टेट सेक्रेटरी कामरेड बंत सिंह बराड़ ने आज स्थानीय शहीद कामरेड अमोलक सिंह औलख भवन में पार्टी की जिला स्तरीय कन्वेंशन को संबोधित करते हुए कहे।
‘सांप्रदायिक जहर घोलकर ध्यान भटकाने की कोशिश’:
कन्वेंशन को विशेष रूप से संबोधित करते हुए पार्टी के नेशनल काउंसिल मेंबर और पूर्व विधायक कामरेड हरदेव अर्शी ने कहा कि मोदी सरकार ने कॉर्पोरेट सेक्टर के दबाव में अपने 12 साल के राज में बेरोजगारी और महंगाई को रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा दिया है। इस वजह से मजदूरों और छोटे व्यापारियों के लिए रोजी-रोटी कमाना भी मुश्किल हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि लोगों की बढ़ती बेचैनी से ध्यान हटाने के लिए देश में सांप्रदायिक जहर फैलाया जा रहा है, जिसका उदाहरण बीजेपी शासित राज्यों में बकरीद के मौके पर मुस्लिम समुदाय पर लगाई गई पाबंदियां हैं।
पंजाब के बुनियादी मुद्दों को हल करे केंद्र:
कामरेड अर्शी ने कहा कि केंद्र सरकार देश के फेडरल स्ट्रक्चर (संघीय ढांचे) को खत्म करने की बेताब कोशिशें कर रही है। उन्होंने मांग की कि मोदी सरकार पंजाब के बुनियादी मुद्दों को तुरंत हल करे, जिनमें शामिल हैं:-
पंजाब का पानी बचाना।
दूसरे राज्यों को दिए जा रहे पानी की कीमत वसूलना।
राजधानी चंडीगढ़ को तुरंत पंजाब को सौंपना।
भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (BBMB) में पंजाब का खत्म किया गया हिस्सा वापस दिलाना।
इस मौके पर जिला एग्जीक्यूटिव सेक्रेटरी प्रेम चावला ने कहा कि देश के मजदूर वर्ग ने लंबे संघर्षों से जो हक हासिल किए हैं, उन्हें कॉर्पोरेट्स के इशारे पर खत्म किया जा रहा है।
कन्वेंशन में पास हुए मुख्य प्रस्ताव और मांगें:
कन्वेंशन के दौरान केंद्र और पंजाब सरकार के खिलाफ कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पास किए गए:-
मजदूरों की दिहाड़ी: पंजाब सरकार से मांग की गई कि मजदूरों की न्यूनतम मजदूरी बढ़ाकर 30,000 रुपये प्रति महीना की जाए।
पेंशन और भत्ते: पुरानी पेंशन स्कीम (OPS) को तुरंत बहाल किया जाए। माननीय पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के आदेशों के अनुसार, कर्मचारियों और पेंशनरों को केंद्र की तर्ज पर 60 प्रतिशत महंगाई भत्ता (DA) दिया जाए और कोर्ट को गुमराह करना बंद हो।
मनरेगा और महंगाई: केंद्र सरकार से पुरानी मनरेगा स्कीम को बहाल करने, महंगाई पर लगाम लगाने और पेट्रोल-डीज़ल की बढ़ी हुई कीमतें तुरंत वापस लेने की मांग की गई।
दिवंगत कामरेड स्मित्तर सिंह बराड़ का परिवार सम्मानित:
कन्वेंशन के दौरान लंडे गांव के दिवंगत कामरेड स्मित्तर सिंह बराड़ की याद को ताज़ा किया गया। उनके परिवार के सदस्यों-पेंशनर नेता प्रदीप सिंह बराड़ और प्रिंसिपल गुरदीप कौर बराड़ को विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
7 जून को मनाई जाएगी 35वीं बरसी:
कम्युनिस्ट नेताओं ने ऐलान किया कि हर साल की तरह इस बार भी 7 जून को गांव औलख में शहीद कामरेड अमोलक सिंह औलख और उनके छह साथियों की शहादत को श्रद्धांजलि देकर 35वीं बरसी पूरे क्रांतिकारी जोश के साथ मनाई जाएगी।
लाल झंडों के साथ गूंजे नारे, भाई घनैया चौक पर समाप्त हुआ मार्च:
कन्वेंशन के समापन के बाद हुक्मरानों की गरीब विरोधी नीतियों और महंगाई के खिलाफ एक विशाल विरोध मार्च निकाला गया। हाथों में लाल झंडे लिए कार्यकर्ताओं ने ज़ोरदार नारेबाजी की। यह मार्च शहर के अलग-अलग बाज़ारों से होते हुए भाई घनैया चौक पहुँचकर संपन्न हुआ।
ये प्रमुख नेता रहे मौजूद:
कन्वेंशन को पंजाब खेत मज़दूर सभा के ज़िला अध्यक्ष कामरेड गुरनाम सिंह मनी सिंह वाला, कुल हिंद किसान सभा के ज़िला अध्यक्ष सुखजिंदर सिंह तुम्बरभान, नरेगा यूनियन के कामरेड वीर सिंह कमेआना, गोरा सिंह पिपली, पेंशनर नेता हरपाल सिंह मचाकी, कुलवंत सिंह चानी, गुरचरण सिंह मान, आउटसोर्स कर्मचारी नेता बलकार सिंह सहोता और नरेगा नेता लवप्रीत कौर पिपली ने भी संबोधित किया।
इस मौके पर पूर्व सरपंच जगतार सिंह भाना, मुख्तियार सिंह भाना, गुरदीप सिंह दीप सिंह वाला, बोहड सिंह औलख, रेशम सिंह जटाना, जसवंत सिंह निक्का औलख, शिव कुमार शर्मा, जगतार सिंह पप्पी राजो वाला, हरविंदर शर्मा, सोम नाथ अरोड़ा, नाहर सिंह गिल, सुखदेव सिंह मल्ली, शिविंदर पाल सिंह संधू, किसान नेता जतिंदर सिंह, मेजर सिंह जोहल, इकबाल सिंह रण सिंह वाला, अमरजीत सिंह कलेर, जसविंदर सिंह दीप सिंह वाला, सतनाम सिंह सिरसारी समेत कई गांवों से बड़ी संख्या में नरेगा और खेत मजदूर मौजूद थे।
न्यूज़: 31-2
फोटो: कन्वेंशन और विरोध मार्च की तस्वीरें।

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