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जमीन के झगड़े ने लिया हिंसक मोड़: घर में घुसकर महिलाओं पर हमला, गांव में फैला डर और तनाव

admin
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जौनपुर।

जिले के सरायख्वाजा थाना क्षेत्र के अतरही गांव में जमीनी विवाद ने एक बार फिर हिंसक रूप ले लिया। दो पक्षों के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद ने 15 अप्रैल को ऐसा मोड़ लिया कि मामला गाली-गलौज से बढ़कर मारपीट तक पहुंच गया। इस घटना में महिलाओं के घायल होने से गांव में तनाव का माहौल बना हुआ है।

पीड़ित पक्ष की ओर से राजदेई, पत्नी रामहित ने आरोप लगाया है कि उनके पट्टीदार रामजीत और रामनिहोर विवादित जमीन को लेकर उनके घर पहुंचे और भद्दी-भद्दी गालियां देने लगे। जब परिवार ने इसका विरोध किया तो स्थिति और बिगड़ गई। आरोप है कि इसके बाद रामजीत के बेटे—गोरख, लालू और शौरभ—भी मौके पर पहुंच गए और घर में घुसकर महिलाओं के साथ मारपीट शुरू कर दी।

इस हमले में पीड़ित परिवार की बहुएं—किरण, रीमा और हेमलता—गंभीर रूप से घायल हो गईं। परिजनों के अनुसार, महिलाओं को काफी चोटें आई हैं और वे अभी भी दहशत में हैं। घटना के बाद गांव में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और आसपास के लोग मौके पर जुट गए।

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पीड़ित परिवार ने तत्काल सरायख्वाजा थाने में तहरीर देकर न्याय की गुहार लगाई। हालांकि, परिवार का आरोप है कि पुलिस ने उनकी शिकायत पर तुरंत कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। उल्टा, पीड़ित पक्ष को ही थाने पर बैठाए रखा गया तथा तहरीर बदल दी और बाद में उनका मेडिकल परीक्षण कराया गया। इस रवैये से परिवार में नाराजगी और असुरक्षा की भावना और बढ़ गई है।

राजदेई का कहना है कि उन्हें न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक रूप से भी प्रताड़ित किया जा रहा है। उनका आरोप है कि आरोपी पक्ष लगातार दबाव बना रहा है, जिससे पूरा परिवार भय के साये में जीने को मजबूर है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि घटना के बाद भी आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं, जिससे पीड़ित परिवार की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

पीड़ित परिवार ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराने, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और परिवार को सुरक्षा प्रदान करने की मांग की है। वहीं ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते इस तरह के विवादों का समाधान नहीं किया गया तो आगे और गंभीर घटनाएं हो सकती हैं।

फिलहाल, यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सबकी नजर प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है कि आखिर पीड़ित परिवार को कब तक न्याय मिल पाता है और दोषियों पर कब तक शिकंजा कसा जाता

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