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श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र है कछरवार,150 वर्षो से चालू है इलाज

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उमरिया।(यस न्यूज प्रतिनिधि):शरद् पूर्णिमा के पावन अवसर पर आज वैद्य लोग कई प्रकार की जड़ी बूटियों को चंद्रमा की शीतल चांदनी में जो आज सतत अमृत वर्षा करता है,रखते है और उन्हें शोधित कर मरीजो को देते है।अस्थमा के रोगियों के लिए यह दबा वरदान से कम नहीं है। जगह आज के दिन औषधि दी जाती है।वैसे ही उमरिया जिला मुख्यालय से महज सात किलोमीटर की दूरी पर उमरार नदी के किनारे बसा कछरवार की पावन धरती है। जहाँ पर आज भी प्रभात फेरी बीस वर्षो से अनवरत जारी है एवं प्राचीन शिव मंदिर में मंगलवार को अखंड मानस का कार्यक्रम जारी है। इसी तरह से मां फूलमति मंदिर में प्रत्येक सोमवार को भंडारे का आयोजन होता है।

गाँव में भी वैद्य जी के नाम से मशहूर स्वर्गीय खुशी लाल विश्वकर्मा के पूर्वजों से तीसरी पीढ़ी से लगभग 150 वर्ष से शुरू हुई दवाई आज भी उनके भाई रामखेलावन एवं बालकेश विश्वकर्मा (लाला) द्वारा दी जा रही है। इस दबा को खाने के लिए मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ उत्तर प्रदेश एवं अनेक राज्यों से लोग बड़ी संख्या में आते हैं। इस दबा को खाने से दमा, अस्थमा जैसे अनेक तरह की बीमारियां ठीक होती है। शरद् पूर्णिमा की रात भर चांद की मनमोहक चांदनी में बैठ कर भजन कीर्तन करते हैं और रात के तीसरे पहर में दबा दी जाती है। इस दबा की विशेषता है कि साल भर में केवल अश्विन (क्वार) की शरद् पूर्णिमा को ही दबा दी जाती है जिसे लोग बड़े ही विश्वास के साथ बहुत दूर दूर से लेने आते हैं। हम सभी ग्रामवासी इस नेक कार्य के लिए बहुत बहुत बधाई एवं धन्यवाद आभार प्रगट करते हैं। शरद पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा भी कहा जाता है,मान्यता है कि आज रात को मां लक्ष्मी निकलती है और पुकार लगाती है कि कौन जाग रहा है,इसलिए आज खीर बना कर आधी रात में मां लक्ष्मी को भोग लगा कर खीर या दुग्धपान की परंपरा है।एक अन्य मान्यता में वृन्दावन में भगवान कृष्ण महारास रचा रहे थे और ऊपर से चन्द्रमा बड़ा ही भावविभोर हो कर देख रहा था,और उसी अवस्था मे उसने धरती पर अमृत की वर्षा की थी।

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