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हाथियों ने बैगानटोला में मचाया उत्पात, घर तोड़े और धान की उड़ाई दावत,प्रशासन ने नुकसान का किया भुगतान

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टांकी के बैगानटोला में बुधवार की रात हाथियों के समूह ने मचाया हंगामा,तेड़े कई घर,दीवाल,प्रशासन ने 3 गांव में हुए नुकसान की राशि का किया भुगतान

अनूपपुर/21 अक्टूबर:विगत 27 सितंबर की शाम छत्तीसगढ़ राज्य की सीमा से मध्य प्रदेश राज्य के अनूपपुर जिला में वन क्षेत्र कोतमा के टांकी बीट में आए 40 हाथियों के समूह द्वारा विगत 25 दिन के मध्य ग्राम टांकी मलगा,भलमुडी,सैतिनचुआ नगर परिषद डूमरकछार के बैगानटोला पावटोला,यादव मोहल्ला कोहका खोडरी नंबर 02 आदि गांव के किसानों के खेतों में लगी धान के साथ अन्य फसलों को निरंतर खाकर,चलकर नुकसान कर रहे हैं वहीं अनेको घरों को तोड़कर दीवार तोड़कर घरों तथा गाड़ियों में रखी तथा लागी सब्जियों धान व अन्य खाद्य सामग्रियों का सेवन कर रहे हैं।विगत शुक्रवार की रात हाथियों का समूह टांकी जंगल से निकलकर नवाटोला,फुलवारी टोला छपराटोला से वापस आकर बैगानटोला जहां 15-20 बैगा परिवार रहते हैं के घरों में नुकसान पहुंचाया जहां मैकू बैगा का घर गुड्डा बैगा का दरवाजा बुधराम बैगा का दरवाजा ननकू बैगा का घर में तोड़फोड़ की तथा 10-12 किसानो के खेतो मे लगी धान की फसलो का नुकसान कर सुबह होने पर पुनः टांकी के जंगल लड़ाई डरयीझोरखी जंगल व झिरियानाला में आराम करने चले गए हाथियों द्वारा विगत 25 दिनों के मध्य किए गए फसल हानि,मकान हानि के 210 प्रकरणों का सर्वेक्षण कार्य राजस्व विभाग एवं वन विभाग के मैदानी अमला द्वारा पूर्ण कर लिया गया है वहीं 50-60 का सर्वेक्षण किया जा रहा है इस दौरान तहसीलदार कोतमा मनीष शुक्ला द्वारा 18 अक्टूबर को भलमुडी,फुलकोना एवं डूमरकछार के 34 कृषकों एवं ग्रामीणों के घरों तथा खेतों में लगी फसलों के नुकसान पर ₹2,39,971 रू,का मुआवजा भुगतान कृषकों के खातों में ई पेमेंट के माध्यम से किया गया है वन विभाग तथा जिला प्रशासन हाथियों के समूह पर पूरी तरह नजर बनाए हुए हैं वहीं शाम होते ही टांकी के जंगल से लगे हुए तीन ओर के ग्रामीणों को सुरक्षा की दृष्टि से नगर परिषद एवं ग्राम पंचायतों के भवनों में सुरक्षा की दृष्टि से रखा जा रहा है तथा रात्रि में उनके ठहरने व खाने की व्यवस्था की जा रही है तथा हाथियों के समूह पर निरंतर नजर बनाये है जिला प्रशासन एवं वन विभाग के जिला अधिकारियों ने आमजनों से हाथियों के समूह से दूर रहने तथा रात्रिकालीन जंगल के किनारे स्थित घरों झोपड़ियों में ना रहने की सलाह दी।

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