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आदिवासी छात्र संगठन मामले को लेकर पहुंचे कमिश्नर कार्यालय

अमरकंटक: इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजाति विश्वविद्यालय एकमात्र जनजातीय विश्वविद्यालय हैं किंतु यहां चिंता का विषय यह है कि विश्वविद्यालय में आदिवासियों का ही शोषण हो रहा है और विश्वविद्यालय प्रशासन मौन है, शोषण के खिलाफ आज 29 नवंबर 2019 को आदिवासी छात्र संगठन द्वारा आयुक्त महोदय को ज्ञापन सौंपा गया है जिसमें छात्राओं के शोषण के खिलाफ सख्त से सख्त कार्यवाही की मांग की गई है और ऐसा ना होने पर आंदोलन की बात भी कहीं गई है जिसके जिम्मेदार विश्वविद्यालय एवं जिला प्रशासन होंगे.
ज्ञात है कि 20 नवंबर 2019 को विश्वविद्यालय के ” अंग्रेजी व विदेशी भाषा विभाग” की शोधार्थी छात्रा सोनू सिंह ने विभाग के सहायक प्राध्यापक संतोष कुमार सोनकर पर शारीरिक व मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाया है जिसके बाद से ही विश्वविद्यालय प्रशासन में तनाव का माहौल है, सभी विद्यार्थी सोनू के लिए न्याय की मांग कर रहे हैं. वही आज आदिवासी छात्र संगठन के कार्यकर्ताओं ने भी ज्ञापन सौंपा है जिसमें विश्वविद्यालय में छात्राओं के शोषण पर कार्यवाही की मांग की गई है.

मांग उक्त है:-
1 डॉ. संतोष कुमार सोनकर और सोनू के मामले की जांच की जाए और दोषियों के खिलाफ कार्यवाही की जाए.
2 प्रोफेसर राकेश सिंह द्वारा एक आदिवासी बच्ची का शारीरिक व मानसिक शोषण कर उसे मार दिया गया जिसकी मीडिया कवरेज भी संलग्न है.
3 प्रोफेसर अभिलाषा सिंह द्वारा एक आदिवासी नाबालिग बच्ची को घर में बंधुआ मजदूर की तरह रखकर काम और उसका मानसिक व शारीरिक शोषण किया गया जिसकी मीडिया कवरेज संलग्न है.
छात्रों द्वारा इन सभी विषय पर कार्यवाही की मांग की गई है.


आदिवासी छात्र संगठन के अध्यक्ष रोहित मरावी ने वार्ता के दौरान बताया कि शहडोल कमिश्नर और आईजी को संयुक्त लेटर लिखकर उक्त मामले की जांच करने का आवेदन किया है। उन्होंने बताया है कि प्रोफेसर सोनकर के अलावा अतीत में हुए 2 मामलों पर भी प्रोफेसर पर लगे आरोपों संबंधित न्यूज़ पेपर की कटिंग को साक्ष्य प्रस्तुत कर। मामले से अवगत कराया है, कमिश्नर ने स्वयं आवेदन को संज्ञान में लेकर कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।

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