बाबा फरीद पब्लिक स्कूल में नाटक ‘तू अगला वर्का फोल’ का मंचन: 1947 से 2026 तक के मानवीय दर्द की जीवंत दास्तां—-

फरीदकोट (अलेक्जेंडर डिसूजा): मालवा की प्रसिद्ध धार्मिक व शैक्षणिक संस्था के संस्थापक स्वर्गीय श्री इंद्रजीत सिंह खालसा जी की पावन स्मृति में, ‘लोक रंग मंच फरीदकोट’ द्वारा बाबा फरीद पब्लिक स्कूल में नाटक “तू अगला वर्का फोल” का सफल मंचन किया गया। सामाजिक और ऐतिहासिक सरोकारों को समेटे इस नाटक ने दर्शकों को झकझोर कर रख दिया।
नाटक का सार-इतिहास और भविष्य का संगम:
बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी डॉ. साहिब सिंह द्वारा लिखित, निर्देशित और अभिनीत इस नाटक की कहानी साल 1947 के विभाजन से शुरू होकर वर्ष 2026 तक के सफर को तय करती है।
मुख्य कथानक: नाटक एक महिला की त्रासदी और संघर्ष के इर्द-गिर्द घूमता है, जो 1947 के बंटवारे के वक्त 15 वर्ष की थी और साल 2026 तक 94 वर्ष की आयु तक पहुँचती है।
विषय: डॉ. साहिब सिंह ने धार्मिक उन्माद, सांप्रदायिक वैमनस्य और गिरती इंसानियत को बेहद संवेदनशीलता के साथ पर्दे पर उतारा। एक महिला के संघर्ष को उसके जीवन में आए विभिन्न पुरुषों-दादा, पति, बेटा और पोता-के माध्यम से बखूबी दिखाया गया।
प्रमुख विचार और संदेश:
कार्यक्रम के दौरान प्रसिद्ध विचारक डॉ. दविंदर शैफ़ी ने स. इंदरजीत सिंह खालसा जी की कलात्मक रुचि और समाज के प्रति उनके दूरदर्शी दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह नाटक समाज को आपसी प्रेम, सद्भाव और मानवता के पथ पर चलने की प्रेरणा देता है। यह पंजाबी थिएटर के इतिहास का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है।
नाटक की समाप्ति पर विद्यार्थियों और शिक्षकों ने खड़े होकर (स्टैंडिंग ओवेशन) कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।
कार्यक्रम में गणमान्य हस्तियों की उपस्थिति:
इस आयोजन को सफल बनाने में संस्था की प्रबंधन समिति और लोक रंग मंच की टीम का विशेष सहयोग रहा।
प्रशासनिक सदस्य: स. सिमरजीत सिंह सेखों (अध्यक्ष), स. गुरजाप सिंह सेखों, स. सुरिंदर सिंह रोमाना, डॉ. गुरिंदर मोहन सिंह और स. नरिंदरपाल सिंह बराड़।
संस्था प्रमुख: एग्जीक्यूटिव प्रिंसिपल मैडम सुखदीप कौर एवं लॉ कॉलेज के प्रिंसिपल श्री पंकज गर्ग।
लोक रंग मंच टीम: सुखवीर सिंह कुंडल, अनंतदीप सिंह बराड़, वरिंदर सिंह गिल, अमनदीप सिंह लकी और जसवीर सिंह जस्सी।
सम्मान समारोह:
समापन अवसर पर स्कूल कमेटी द्वारा डॉ. साहिब सिंह, डॉ. दविंदर शैफ़ी और स. सुखवीर सिंह कुंडल को दुशाला, स्मृति चिन्ह (ट्रॉफी) और स. इंदरजीत सिंह खालसा जी द्वारा रचित पुस्तक भेंट कर सम्मानित किया गया। इसी प्रकार, लोक रंग मंच की टीम ने भी संस्था के प्रमुखों को विशेष रूप से सम्मानित किया।
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