शिक्षा बचाओ यात्रा की टीम का ब्यौहारी में आगमन और प्रेसवार्ता आयोजित

शिक्षा बचाओ यात्रा की टीम का ब्यौहारी में आगमन और प्रेसवार्ता आयोजित

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शिक्षा बचाओ यात्रा की टीम का ब्यौहारी में आगमन और प्रेसवार्ता आयोजित

शहडोल,ब्यौहारी।

 

पवित्र नगरी अमरकंटक से शुरू हुई शिक्षा बचाओ यात्रा आज ब्यौहारी पहुंची जो कुल 34 जिलों के भ्रमण में जागरूकता की मुहिम लिए चल पड़ी है। दो सदसीय टीम व अपने 2 सहयोगियों के साथ यह यात्रा से सचलित की जा रही है। इसमें खाने की समाग्री व साधन भी उपलब्ध है।यात्रा की शिक्षा तथा उनके बचपन को बचाने के उद्देश्य से निकाली गई है।यात्रा का प्रमुख उद्देश्य विद्यालय संचालकों, अभिभावकों तथा विद्यार्थियों के समक्ष शिक्षा एवं विद्यालय का महत्त्व समझाने और विद्यार्थियों को पुनः विद्यालय की ओर आकर्षित करने का है !

स्थानीय भारतीयम स्कूल ब्योहारी में अभियान के संयोजक , ब्यौहारी के विद्यालयों के संचालक व पत्रकार गण उपस्थित रहे। इस दौरान शिक्षकों विद्यालय संचालकों और पत्रकारों से वर्तमान में शिक्षा पद्धति और क्रियान्वयन से जुड़ी हुई बातों पर चर्चा किया गया।

प्रेस वार्ता में मोहन नागवानी(यात्रा संयोजक) और जुगल मिश्रा(सह संयोजक) ने बताया कि यात्रा किसी संगठन विशेष की यात्रा नहीं है अपितु यह विद्यालय खोले जाने हेतु जन जागरण अभियान है lइनका उद्देश्य सरकार को केवल यह समझाना है की विद्यालयों में अनुशासन के साथ कोरोना गाइडलाइन की सावधानियों का पालन करते हुए हम सभी को विद्यालय खोलने की अनुमति प्रदान की जाए !

 

 

दरअसल विद्यालयों से अधिक अनुशासन ना तो किसी शादी विवाह जलसे या मीटिंग में होता है l अतः यदि अभिभावक भी कोरोना गाइड लाइन का पालन करें और संचालक एवं शिक्षक भी, तो लगभग 50% की क्षमता से कक्षा पहली से आठवीं तक के विद्यार्थियों को विद्यालय बुलाया जा सकता है l दुनिया देश समाज के भविष्य बच्चों का भविष्य खतरे में है क्या स्कूल बंदी ही कोरोना का इलाज है। विगत 1 वर्ष से करो ना कॉल के चलते हमारा शिक्षा का ढांचा पूरी तरह से ध्वस्त हुआ उसके परिणाम हमें भविष्य में देखने को मिलेंगे जहां एक और बच्चा का बचपन शिक्षा अनुशासन निरंतरता सामाजिकता समूह भावना तथा सामाजिक मूल्यों का पतन हुआ है वहीं दूसरी ओर समाज के एक अध्यक्ष भय से जकड़ता जा रहा है।

 

 

जाहिर सी बात है इस दौरान सबसे ज्यादा प्रभावित गरीब शोषित एवं वंचित समूह के बच्चे हुए हैं जिनके अभिभावकों  ने चाह कर भी नहीं करा पा रहे और ना ही बच्चे चाह कर भी पढ़ पा रहे हैं एक अनुमान के मुताबिक प्रदेश के लगभग 70 लाख बच्चे जो ग्रामीण क्षेत्र शहरी क्षेत्र के गरीब बच्चे तथा अशासकीय स्कूलों में पढ़ रहे गरीबी रेखा के नीचे की श्रेणी के बच्चे मुख्य हैं सर्वाधिक प्रभावित ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चे जहां संचार का आधारभूत ढांचा नहीं है एवं गरीबी है इसका मुख्य कारण विद्यालयों का बंद होना तथा संचार साधनों जैसे टीवी मोबाइल एवं इंटरनेट के भरोसे पढ़ाई लिखाई की व्यवस्था का होना है। फलस्वरुप बच्चे विद्यालय के माहौल से वंचित हो गए हैं जहां उनका मानसिक शारीरिक एवं बौद्धिक विकास सुनिश्चित होता था इस दौरान बच्चों का एक नया वर्ग उभर कर सामने आया है जो इंटरनेट के अंधे गलियारों एवं भूल भुलैया में नई दुनिया को पाकर कई मानसिक विकृतियों का शिकार हो रहे हैं तथा मार्गदर्शन के अभाव में सही गलत में अंतर नहीं कर पा रहे हैं क्या स्कूल बंदी ही इस दौर का विकल्प है जहां पूरी दुनिया के हर क्रियाकलाप एक नियम कानून के दायरे में बंधकर संचालित हो रहे हैं क्या हमारे नैनी हालो को शाला का कोई विकल्प शाला के

ही रूप में विभिन्न स्वास्थ्य सुरक्षा मानकों के लागू करते हुए संभव नहीं है।इसका एक सरल हल संभव है कि स्कूल बंदी के निर्णय राज्य स्तर पर न लेकर जिला कलेक्टर के ऊपर छोड़ दिया जाए l वे अपने जिले के कोरोना मुक्त क्षेत्रों में स्वविवेक से शालाएं संचालित करने का निर्णय ले जबकि परीक्षा संबंधी निर्णय राज्य एवं केंद्र सरकारों द्वारा लिए जावे। आरटीआई के अंतर्गत अध्ययनरत बच्चों की शिक्षा दीक्षा पर विशेष व्यवस्थाएं कर ध्यान दिया जावे एवं प्रगति पर सतत नजर रखी जावे।

“शिक्षा बचाओ-बचपन बचाओ अभियान यात्रा अमरकंटक से कई मुख्य स्थानो से होते हुए 05 अप्रैल सोमवार को प्रातः साढे दस बजे ब्यौहारी नगर के मध्य
में स्थित भारतीयम् हाई स्कूल पहुचीं। जहां पर इस अभियान के संयोजक जुगलकिशोर मिश्रा व सहयोगी मोहनदास जगवानी के स्वागत सम्मान में रवि मिश्रा (सेण्ट्रल एकेडमी), पारूल सक्सेना (भारतीयम् स्कूल), पी0के0टिक्कू (नीरू पब्लिक स्कूल ब्यौहारी)
के द्वारा स्वागत सम्मान किया गया।

इस मौके पर अनुज द्विवेदी (संस्कार विद्या मंदिर),
देशराज सिंह/बाबूराम यादव (सरस्वती ज्ञान मंदिर ब्यौहारी/देवलोंद), ओ.पी.दुबे (SNDAVस्कूल),  विजय प्रधान (गांधी मेमोरियल) के द्वारा भी स्वागत सम्मान किया गया।

इस मंच में उपस्थिति गणनान्य नागरिक, अभिभावकबन्धु इलेक्ट्रानिक मीडियाग्रुप व पत्रकारबन्धु भी उपस्थित रहे। प्रेसवार्ता के माध्यम से सभी ने अपने मत व्यक्त करते हुए कहा कि इस वैश्विक आपदा से नौनिहालों की शिक्षा दीक्षा पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है।

घरों पर बच्चे ऑनलाईन मोबाईल, इन्टरनेट या टेलीवीजन के माध्यम से शिक्षा ग्रहण करने के बजाय अनावश्यक गेम,व यूट्यूब को देखने से बिगड रहे है।
सिनेमाहाल, हॉट-बाजार, स्टेडियम, पार्क, स्टेशन, बस स्टैण्ड, चुनावी रैलियों आदि को कोविड-19 के
नियमों से मुक्त रखा गया है। केवल नन्हे मुन्ने बच्चों के कक्षा 1 से 8 तक की ही रोक क्यों है? कक्षा 9 से 12 तक SOP और अभिभावको की सहमति के आधार पर बच्चों की शिक्षा प्रारत्भ कराई जा रही है तो इसी प्रकार पहली से 8वीं तक की शालाएं भी खोली जाय,ताकि बालको का शारीरिक,बौद्धिक,तार्किक सर्वांगीण विकास हो सके।

विजय मत अखबार के सम्पादक विजय शुक्ला के मतानुसार स्कूल बंन्दी का निर्णय राज्यस्तर पर न लेकर जिला कलेक्टर स्तर पर सर्वनिर्णय लेना अच्छा रहेगा। वेअपने जिले के स्थानीय स्तर पर कोरोनामुक्त क्षेत्रों में स्वविवेक से शालाएं खुलवाने का निर्णय कोविड-19 नियमानुसार ले सकते है।

मोहनदास व जुगलकिशोर ने प्रेसकांफ्रेंस कर बालशिक्षा को पूर्वानुसार शालाएं संचालित करने व विजयमत के सम्पादक विजय शुक्ला के मत का समर्थन करते हुए सभी से पूर्ण समर्थन/आर्शीवाद प्राप्त करने के साथ बाल शिक्षा पर हो रहे कुठाराधात से बचाने के प्रयास में 34 जिलों की यह यात्रा शासन को ज्ञापन देने के बाद वापस कटनी पहुचेगी। अंत में स्वागत-सम्मान व पत्रकारवार्ता में उपस्थित समस्त शाला संचालकों, अभिभावको का पी.के.टिक्कू द्वारा आभार व्यक्त किया गया व शिक्षा बचाओं अभियान के संयोजक जगवानी जी व उनके सहयोगी जुगलकिशोर को इस यात्रा की सफलता व उज्जवल भविष्य की कामना करने के साथ भारतीयम स्कूल ब्यौहारी के संचालक सुनील पाण्डेय व उनके समस्त कर्मचारी समूह को बहुमूल्य सहयोग के लिए साधुवाद, धन्यवाद के साथ बैठक विसर्जन करने की घोषणा की।

 

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