New Traffic Fines:चालान भरने को पहले मिलता था एक महीने का समय और अब… – UK MISHRA

नए मोटर वाहन अधिनियम के सख्ती से लागू होने के बाद मामलों के निपटारे के लिए सभी 11 जिला अदालतों में विशेष अदालतें लगनी शुरू हो गई हैं। अब इन अदालतों को रोजाना लगाने का निर्णय किया गया। अवकाश वाले दिन भी ये अदालतें लगेंगी।

पुराने मोटर वाहन अधिनियम के तहत चालान होने पर यातायात पुलिसकर्मी कम से कम एक महीने का समय अदालत में पेश होने के लिए देते थे। मगर नए मोटर वाहन अधिनियम के तहत दो से चार दिन का समय अदालत में पेश होकर जुर्माना भरने के लिए दिया जा रहा है। अगर वाहन चालक मौके पर ही जुर्माना भरने को तैयार हो जाता है तो उसे वहीं निपटा भी देते हैं।

जिला जज की तरफ से जारी अधिसूचना में स्पष्टतौर पर कहा गया है कि जब तक संबंधित अदालत का काम पूरा नहीं होगा, अदालतें लगी रहेंगी। इसके लिए न्यायिक अधिकारियों और कर्मचारियों को अतिरिक्त समय देना होगा। पहले ही सभी विशेष ट्रैफिक अदालतों के लिए भी ड्यूटी रोस्टर जारी कर दिया गया है। रोस्टर में कहा गया है कि किसी भी स्थिति में संबंधित न्यायिक अधिकारी अवकाश नहीं लेगा। अगर कोई आपात स्थिति बनती है तो संबंधित न्यायिक अधिकारी को निजी स्तर पर दूसरे न्यायिक अधिकारी से आपसी सहमति से ड्यूटी बदलने का निर्णय लेना होगा।

अधिसूचना में कहा गया है कि संबंधित तारीख के मामले उसी दिन निपटाने होंगे। साथ ही एक दिन का वसूला गया जुर्माना और जब्त वाहन को सुपरदारी पर छोड़ने संबंधी आदेश भी उसी दिन जारी करने होंगे। प्रत्येक सर्किल के हिसाब से न्यायिक अधिकारी वसूले गए जुर्माने का हिसाब भी उसी दिन तैयार करेंगे। दरअसल, यह कवायद नए मोटर वाहन अधिनियम के तहत लोगों को असुविधा से बचाने के लिए की जा रही है।

कई वर्ष पहले चालान हुआ, अब दौड़ रहे  
नया मोटर वाहन अधिनियम लागू होने से लोगों में भय का माहौल है। हालात यह हैं कि बड़ी तादात में अदालतों में ऐसे लोग पहुंच रहे हैं, जिनका चालान वर्षों पहले हुआ था, लेकिन उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी। अब ट्रैफिक पुलिस की वेबसाइट पर अपने वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर डालकर जांचने पर उन्हें वर्षों पुराने चालान का पता चल रहा है, ऐसे ही कई मामले सोमवार को सामने आए।

 

सीलमपुर निवासी आकाश के चार पहिया वाहन का चालान तेज रफ्तार की वजह से 16 फरवरी 2016 को हुआ था। इसकी जानकारी आकाश को नहीं थी। मगर अब दोस्त के कहने पर उन्होंने ट्रैफिक पुलिस की वेबसाइट पर अपने वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर डालकर जांचा तो पता चला कि उसका साढ़े तीन साल पहले ओवरस्पीड का 400 रुपये का चालान लंबित है। यह जानकारी मिलते ही वह तुरंत कड़कड़डूमा अदालत पहुंचा। इसी तरह पिछले साल 31 अक्तूबर को सूरजमल विहार निवासी दिनेश का चालान हुआ था। उन्होंने भी वेबसाइट पर जाकर जांच की तो पता चला कि उनकी बाइक का 100 रुपये का चालान बकाया है। वहीं, द्वारका अदालत में भी कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। अपने चार पहिया वाहन का पुराना चालान भुगतने पहुंचे रतन गिल ने बताया कि उनका ओवर स्पीड का चालान सात महीने पहले हुआ था। वेबसाइट के जरिए ही उन्हें पर चालान का पता चला। वह जुर्माना भरने अदालत पहुंचे, मगर अदालत में अधिक मामले होने के चलते अगली तारीख लग गई।

अदालत दी रही मोहलत
यातायात नियमों का उल्लंघन करने पर एक चार पहिया वाहन के मालिक का 23 हजार रुपये का चालान काटा गया। यह व्यक्ति  सोमवार को तीस हजारी स्थित मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट मल्होत्रा की अदालत में पहुंचा। उसने तंग आर्थिक हालात का हवाला देते हुए कहा कि उसका वाहन बहुत पुराना है। वह तुरंत इतनी बड़ी रकम जमा नहीं करा सकता। इस पर अदालत ने इस व्यक्ति को निजी मुचलका भरने के निर्देश देते हुए कहा कि वह अपनी सहूलियत के हिसाब से एक तारीख बताए, जिस दिन वह जुर्माने की रकम भर पाएगा।

क्या कहता है कानून
मोटर वाहन अधिनियम के जानकार अधिवक्ता उपेन्द्र सिंह ने बताया कि पुराने चालान को लेकर वाहन मालिकों को बहुत ज्यादा भयभीत होने की जरूरत नहीं है। अगर उनका चालान हुआ है तो उन्हें पुराने वाहन को बेचने या दूसरे के नाम को स्थानान्तरित करने में परेशानी आएगी। ऐसे वाहनों की बिक्री के समय उनके ऊपर बकाया चालान या देनदारी का मसला उठ सकता है। इस तरह के चालान को ट्रैफिक पुलिस की वेबसाइट पर ऑनलाइन या तीन मूर्ति लेन स्थित  ट्रैफिक पुलिस के कार्यालय पर भरा जा सकता है।